पिहोवा: हरियाणा की सियासी आबोहवा में इन दिनों ‘नाम बदलने’ की राजनीति पर नया बवंडर खड़ा हो गया है। जींद जिले के उचाना में स्थित ‘अंबेडकर लाइब्रेरी’ का नाम बदलकर ‘अटल लाइब्रेरी’ किए जाने के फैसले पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता सरदार सतनाम सिंह विर्क ने इस कदम पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महापुरुषों की विरासत को सियासत का मोहरा बनाना भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक ट्रेंड है।
अंबेडकर केवल एक नाम नहीं, करोड़ों की आस्था का प्रतीक: विर्क
सरदार सतनाम सिंह विर्क ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर महज एक व्यक्ति या किसी खास समुदाय के नेता नहीं थे। वे देश में सामाजिक न्याय, समानता और लोकतंत्र के सबसे बड़े प्रतीक हैं। किसी भी सार्वजनिक संस्थान से उनका नाम हटाने की कोशिश करना सीधे तौर पर देश के करोड़ों शोषितों, वंचितों और न्यायप्रिय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है। विर्क ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस तरह के विवादास्पद फैसले लेकर बार-बार अपनी दलित विरोधी और संकीर्ण मानसिकता का ही परिचय दे रही है।
जनता की भावनाओं का अनादर कर रही है सरकार
कांग्रेस प्रवक्ता ने उचाना के स्थानीय घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा, “उचाना में इस तानाशाही फैसले के खिलाफ जिस प्रकार आम जनता, बहुजन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया है, वह पूरी तरह जायज है।” उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक बाबासाहेब के योगदान का कर्जदार है। ऐसे में एक सम्मानित महापुरुष के नाम पर बनी लाइब्रेरी का नाम बदलना निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को अपनी इस जिद को छोड़कर जनता के आक्रोश को समझना चाहिए और इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।
कांग्रेस की चेतावनी— चुप नहीं बैठेंगे
सत्तारूढ़ दल पर महापुरुषों की विरासत से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए सरदार सतनाम सिंह विर्क ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से डॉ. भीमराव अंबेडकर के दिखाए रास्ते, संविधान की गरिमा और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने समय रहते जनभावनाओं का सम्मान नहीं किया और अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। पार्टी जनता के साथ मिलकर सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेगी। विर्क ने अंत में कहा कि इतिहास और महापुरुषों के सम्मान से खिलवाड़ करने वाली ताकतों को देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करती और आने वाले वक्त में भाजपा को इस राजनीतिक भूल का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

