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Pehowa Hospital: बड़े शहरों का चक्कर खत्म: पिहोवा के डॉ. जे. एस. विर्क हॉस्पिटल में मिल रहा है हर जटिल बीमारी का इलाज

AAmandeep Singh
Pehowa Hospital: बड़े शहरों का चक्कर खत्म: पिहोवा के डॉ. जे. एस. विर्क हॉस्पिटल में मिल रहा है हर जटिल बीमारी का इलाज
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पिहोवा। किसी भी समाज की खुशहाली की पहली शर्त वहां की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था होती है। इस कसौटी पर पिहोवा का ‘डॉ. जे. एस. विर्क हॉस्पिटल’ न केवल खरा उतर रहा है, बल्कि बेहद कम समय में इलाज और भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है। अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों, तजुर्बेकार डॉक्टरों की फौज और मरीजों के प्रति सेवा भाव के चलते यह अस्पताल आज आसपास के दर्जनों गांवों और शहरी आबादी के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि गंभीर और बहु-विशेषज्ञ (मल्टीस्पेशियलिटी) इलाज के लिए अब स्थानीय लोगों को चंडीगढ़, दिल्ली या कुरुक्षेत्र जैसे बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है।

जटिल से जटिल बीमारियों का एक ही छत के नीचे निदान

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अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यहां मरीजों को प्रसूति एवं स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी), ईएनटी (कान, नाक और गला), जनरल सर्जरी, जनरल मेडिसिन, यूरोलॉजी (मूत्र रोग) तथा हड्डी एवं जोड़ रोग (ऑर्थोपेडिक्स) जैसी तमाम विधाओं का इलाज सीनियर डॉक्टरों की देखरेख में मिल रहा है। बुनियादी जांच से लेकर जटिल ऑपरेशनों तक की व्यवस्था एक ही परिसर में होने से मरीजों के समय और पैसे दोनों की बड़ी बचत हो रही है।

हड्डियों की कड़वाहट को न करें नजरअंदाज: डॉ. जसकरण विर्क

अस्पताल के निदेशक और प्रख्यात वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. जसकरण सिंह विर्क ने आज की आधुनिक और सुस्त जीवनशैली पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया, “आजकल की भागदौड़ में लोग अक्सर अपने शरीर के सिग्नलों को पहचान नहीं पाते। घुटनों या हड्डियों से कड़कने की आवाज आना, जोड़ों में हल्का दर्द, मांसपेशियों की जकड़न, या फिर लगातार रहने वाले बदन दर्द को लोग मामूली थकान मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन यह लापरवाही आगे चलकर भारी पड़ सकती है। यह शरीर में कैल्शियम, विटामिन-डी की भारी कमी या गठिया (अर्थराइटिस) जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआती दस्तक हो सकती है।”

खानपान में सुधार और सही समय पर डॉक्टरी सलाह जरूरी

मरीजों को जागरूक करते हुए डॉ. विर्क ने बताया कि अगर हम अपनी थाली को संतुलित कर लें, तो आधी बीमारियां वैसे ही दम तोड़ देंगी। उन्होंने दैनिक आहार में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंडे, बादाम और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करने की पुरजोर वकालत की। इसके साथ ही सुबह की हल्की धूप, नियमित योग और वॉक को उन्होंने सेहतमंद जिंदगी का मूलमंत्र बताया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जोड़ों का दर्द पुराना हो चुका हो या चलने-फिरने में तकलीफ होने लगी हो, तो खुद हकीम बनने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि सही समय पर शुरू हुआ इलाज ही बड़ी सर्जरी के खतरे को टाल सकता है।

संवेदनशीलता और स्थानीय स्तर पर विश्वस्तरीय इलाज

डॉ. जे. एस. विर्क हॉस्पिटल की बढ़ती साख की एक बड़ी वजह यहां का संवेदनशील स्टाफ भी है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मशीनों से ज्यादा जरूरी मरीज को मानसिक संबल देना होता है। स्थानीय स्तर पर कॉर्पोरेट स्तर की चिकित्सा सुविधाएं और डॉक्टरों का दोस्ताना व्यवहार ही इस अस्पताल की असली यूएसपी (खासियत) है। इलाज के साथ-साथ समय-समय पर अवेयरनेस कैंप लगाकर यह संस्थान समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा रहा है।

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