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DTC Free Bus Travel: दिल्ली की बसों में मुफ्त सफर पर बड़ा अपडेट: बिना 'स्मार्ट कार्ड' के भी यात्रा रहेगी जारी, DTC ने दूर किया महिलाओं का कन्फ्यूजन

AAmandeep Singh
दिल्ली की बसों में मुफ्त सफर पर बड़ा अपडेट: बिना 'स्मार्ट कार्ड' के भी यात्रा रहेगी जारी, DTC ने दूर किया महिलाओं का कन्फ्यूजन
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दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को डिजिटल ढांचे में ढालने की कवायद के बीच महिलाओं के मुफ्त सफर को लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लग गया है। दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ अनिवार्य होने की खबरें फिलहाल महज अफवाह हैं। जिन महिलाओं के पास अभी तक नया डिजिटल कार्ड नहीं पहुँचा है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है; वे पहले की तरह ही पिंक पेपर टिकट लेकर बसों में बेधड़क मुफ्त सफर कर सकती हैं।

क्या है पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड और क्यों मची थी अफरा-तफरी?

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दिल्ली सरकार ने हाल ही में महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए मुफ्त सफर की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ पेश किया है। इस पहल का मकसद डेटा को डिजिटल करना है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रोजाना कितनी महिलाएं बसों का लाभ ले रही हैं। हालांकि, कार्ड वितरण की धीमी गति और सोशल मीडिया पर उड़ती खबरों के कारण महिलाओं में यह डर बैठ गया था कि बिना कार्ड के अब कंडक्टर उन्हें बस से उतार देंगे या पैसे मांगेंगे। इसी भ्रम को दूर करने के लिए विभाग को सामने आना पड़ा।

कंडक्टर से मांगें गुलाबी टिकट, विभाग ने दिए निर्देश

परिवहन विभाग के आला अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा है कि जब तक राजधानी की हर पात्र महिला तक स्मार्ट कार्ड नहीं पहुँच जाता, तब तक पुरानी व्यवस्था को रत्ती भर भी प्रभावित नहीं किया जाएगा। बस में चढ़ते ही कंडक्टर आपको पहले की तरह ही पिंक पेपर टिकट जारी करेगा। यह टिकट सफर का वैध प्रमाण माना जाएगा और इसके लिए महिलाओं को एक रुपया भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। विभाग ने कंडक्टरों को भी निर्देशित किया है कि कार्ड के नाम पर किसी भी महिला यात्री के साथ बहस न की जाए।

जल्दबाजी की जरूरत नहीं, अफवाहों से रहें सावधान

DTC ने अपील की है कि स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए केंद्रों पर भीड़ न लगाएं और न ही किसी एजेंट के झांसे में आएं। सरकार चरणबद्ध तरीके से इन कार्डों का वितरण कर रही है। विभाग का कहना है कि डिजिटलीकरण एक लंबी प्रक्रिया है और जब तक जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत कार्ड नहीं बंट जाते, तब तक कागजी टिकट का विकल्प खुला रहेगा। ऐसे में महिलाएं अपनी डेली रुटीन यात्रा को बिना किसी तनाव के जारी रख सकती हैं।

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