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Gundlupet Flower Pot of India: मानसून में देखना है रंगों का समंदर? तो इस मानसून मिस न करें ‘फ्लावर पॉट ऑफ इंडिया’ की ये खूबसूरत सैर

Gundlupet Flower Pot of India: मानसून में देखना है रंगों का समंदर? तो इस मानसून मिस न करें 'फ्लावर पॉट ऑफ इंडिया' की ये खूबसूरत सैर

इस शहर को कहा जाता है ‘फ्लावर पॉट ऑफ इंडिया’

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GGaganpreet Kaur

Gundlupet Flower Pot of India: अगर आप इस मानसूनी सीजन में ऊटी, वायनाड या बांदीपुर की वादियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो रास्ते में अपनी गाड़ी की रफ्तार को थोड़ा धीमा करने के लिए तैयार हो जाइए। कर्नाटक के चामराजनगर जिले में बसा एक बेहद शांत और खूबसूरत कस्बा ‘गुंडलूपेट’ इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर ट्रैवलर्स की डायरी में छाया हुआ है। अमूमन लोग मानसून में सिर्फ हरियाली देखने निकलते हैं, लेकिन गुंडलूपेट एक ऐसी जगह है जहां इस मौसम में कदम रखते ही दूर-दूर तक सिर्फ रंग-बिरंगे फूलों का समंदर नजर आता है। यही वजह है कि इसे देश का ‘फ्लावर पॉट ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। यहां हाईवे के दोनों ओर फैले सुनहरे सूरजमुखी और चटक पीले गेंदे के खेत किसी कैनवास पर उकेरी गई पेंटिंग जैसे जीवंत लगते हैं।

जून से अगस्त के बीच शबाब पर होती है खूबसूरती, कैमरे में कैद होते हैं दिलकश नजारे

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गुंडलूपेट की असली जादुई रंगत देखनी हो, तो जून से लेकर अगस्त तक का महीना यहां आने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। इस दौरान मानसूनी फुहारों के बीच सूरजमुखी और गेंदे की फसलें पूरी तरह से खिल उठती हैं। सुबह की पहली किरण और शाम ढलने के वक्त यहां का नजारा इतना जादुई होता है कि देश भर के वाइल्डलाइफ और लैंडस्केप फोटोग्राफर्स यहां डेरा डाल लेते हैं। आज के दौर में यह जगह कर्नाटक के सबसे पॉपुलर रीयल-लाइफ और प्री-वेडिंग फोटोग्राफी स्पॉट्स में शुमार हो चुकी है। अच्छी बात यह है कि यहां के स्थानीय किसानों ने भी इसे पर्यटन से जोड़ लिया है; वे बेहद कम फीस लेकर पर्यटकों को अपने खेतों के बीच जाने और प्रकृति को करीब से निहारने का मौका देते हैं।

सफर के बीच में बसा है जन्नत का यह टुकड़ा, पहुंचना बेहद आसान

भौगोलिक लिहाज से देखें तो गुंडलूपेट की लोकेशन पर्यटकों के लिए किसी बोनस की तरह है। मैसूर से करीब 60 किलोमीटर और बेंगलुरु से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह कस्बा ठीक उसी नेशनल हाईवे पर पड़ता है जो आगे चलकर ऊटी और वायनाड जैसी मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशंस को जोड़ता है। ऐसे में जो लोग भी दक्षिण भारत के इन पहाड़ों की सैर पर निकलते हैं, वे रास्ते में कुछ घंटे यहां बिताकर अपनी यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना लेते हैं।

शांत माहौल और सफारी का डबल डोज

अगर आपका मकसद सिर्फ और सिर्फ खिलते हुए फूलों के दीदार करना है, तो अगस्त तक का समय सबसे बेहतरीन है। इसके उलट, यदि आप सुहावने मौसम का लुत्फ उठाने के साथ-साथ मशहूर बांदीपुर नेशनल पार्क में वन्यजीव सफारी का रोमांच भी देखना चाहते हैं, तो सितंबर से मार्च के बीच यहां का रुख किया जा सकता है। कमर्शियल हो चुके पारंपरिक हिल स्टेशनों की भीड़भाड़ और शोर-शराबे से दूर, एकांत और सुकून की तलाश कर रहे मुसाफिरों के लिए गुंडलूपेट एक परफेक्ट ऑफबीट डेस्टिनेशन बनकर उभरा है।

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