Hair Fall Reasons: अच्छी और आकर्षक पर्सनालिटी में घने बालों की भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे में जब भी आईने के सामने खड़े होने पर या कंघी करते वक्त झड़े हुए बालों का अंबार दिखाई देता है, तो चिंता होना लाजमी है। कुछ लोग इसे गंजेपन की शुरुआत मानकर घबरा जाते हैं, तो कुछ मौसम में बदलाव का नतीजा समझकर बात टाल देते हैं। इस दौरान मन में कई तरह के सवाल भी उठते हैं—कहीं ये महंगे शैंपू का साइड इफेक्ट तो नहीं? या फिर शरीर में किसी पोषक तत्व की भारी कमी हो गई है?
इन तमाम सवालों के बीच यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर बाल किस हद तक झड़ना सामान्य है और कब यह चिंता का विषय बन जाता है। मेडिकल साइंस के जानकारों और डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार, स्थिति को गहराई से समझकर ही सही कदम उठाया जा सकता है।
नॉर्मल हेयर फॉल और असामान्य बालों के गिरने में अंतर
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के आंकड़े बताते हैं कि एक स्वस्थ मनुष्य के सिर से रोज औसतन 50 से 100 बालों का टूटना या गिरना पूरी तरह प्राकृतिक है। इंसानी सिर पर अमूमन एक लाख के करीब बाल होते हैं, इसलिए रोजाना इतनी मात्रा में बालों का गिरना और उनकी जगह नए बालों का उगना एक सामान्य प्रक्रिया है।
लेकिन अगर बाल अपनी सामान्य मोटाई खोकर पतले होने लगें, झड़ने की रफ्तार अचानक तेज हो जाए या सिर की त्वचा (स्कैल्प) पहले से ज्यादा नजर आने लगे, तो इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए। भारत में गंजेपन की स्थिति को समझने के लिए साल 2009 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्रिकोलॉजी में एक महत्वपूर्ण स्टडी प्रकाशित हुई थी। इस शोध में करीब 1000 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। स्टडी के अनुसार, लगभग 58% पुरुषों में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया यानी पैटर्न के हिसाब से गंजेपन की समस्या दर्ज की गई।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, तुरंत लें एक्सपर्ट की सलाह
यदि किसी व्यक्ति को सिर में लगातार खुजली महसूस हो रही है, बिना किसी चोट के दर्द रहता है, स्कैल्प साफ दिखाई देने लगा है या फिर सिर पर गोल-गोल चिकने पैच बनने लगे हैं, तो यह चेतावनी संकेत है। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय किसी प्रमाणित त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) से परामर्श करना ही समझदारी है।
बालों के झड़ने के पीछे कई मुख्य मेडिकल कारण छिपे होते हैं:
एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (Androgenetic Alopecia): यह हेयर लॉस का सबसे आम कारण है, जो करीब 50 फीसदी लोगों को प्रभावित करता है। आसान भाषा में इसे जेनेटिक या पारिवारिक गंजापन कहा जाता है। पुरुषों में इसके लक्षण माथे के दोनों किनारों से बाल कम होने के रूप में दिखते हैं, जबकि महिलाओं में पूरा सिर धीरे-धीरे पतला होने लगता है।
एलोपेसिया एरियाटा (Alopecia Areata): यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बालों की जड़ों यानी हेयर फॉलिकल्स को नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे सिर पर सिक्के के आकार के खाली पैच बन जाते हैं।
एनाजेन एफ्लुवियम (Anagen Effluvium): कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी लेने पर यह समस्या होती है, जिसमें बहुत तेजी से बाल झड़ते हैं। हालांकि, इलाज पूरा होने के बाद बाल आमतौर पर दोबारा उग आते हैं।
टेलोजन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium): किसी बड़े मानसिक झटके, शारीरिक आघात या लंबे समय से चल रहे गंभीर तनाव के कारण अचानक होने वाला हेयर फॉल इसी श्रेणी में आता है।
क्या है बालों के झड़ने का सही इलाज?
बालों का झड़ना जब तय सीमा से बढ़ जाए, तो इसे चिकित्सीय भाषा में हेयर लॉस माना जाता है। इसका उपचार पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि बाल किस वजह से झड़ रहे हैं। शुरुआती दौर में डॉक्टर मिनोक्सिडिल जैसे लोशन, क्रीम या फोम के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में फिनास्टेराइड जैसी दवाएं भी दी जाती हैं, जो गंजेपन की प्रक्रिया को रोकने में मददगार साबित होती हैं।
आज के समय में ‘हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी’ भी एक बेहद लोकप्रिय और सफल विकल्प बन चुका है। इस तकनीक में शरीर के घने बालों वाले हिस्से (जैसे पीछे के सिर) से हेयर रूट्स निकालकर गंजेपन वाले हिस्से पर प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं। हालांकि, स्कारिंग एलोपेसिया जैसी कुछ खास कंडीशंस में यह तरीका कारगर नहीं होता, इसलिए डॉक्टर की सलाह सबसे अहम होती है।
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