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Haryana Electricity Protest: मुख्यमंत्री का वादा रह गया अधूरा? 15 जून की डेडलाइन से पहले बिजली कर्मचारियों की सरकार को बड़ी चेतावनी

GGaganpreet Kaur
मुख्यमंत्री का वादा रह गया अधूरा? 15 जून की डेडलाइन से पहले बिजली कर्मचारियों की सरकार को बड़ी चेतावनी
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लाडवा (कैलाश गोयल)। हरियाणा में अनुबंधित और आउटसोर्सिंग बिजली कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सार्वजनिक मंचों से किए गए वादों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर जारी ढुलमुल रवैये को लेकर कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है। अनुबंधित विद्युत कर्मचारी संघ हरियाणा (संबद्ध: भारतीय मजदूर संघ) के लाडवा सब-डिवीजन के प्रधान मनजीत सिंह सैनी ने स्थानीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सूबे के आला अफसर सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के आदेशों को हवा में उड़ा रहे हैं, जिसका खामियाजा प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि पर रोशनी डालते हुए मनजीत सिंह सैनी ने याद दिलाया कि गुरुग्राम में आयोजित ‘श्रमिक सम्मान समारोह’ के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की थी कि 15 जून 2026 तक सभी अनुबंधित कर्मियों को उनके नियुक्ति पत्र (ऑफर लेटर) जारी कर दिए जाएंगे। लेकिन इस तय समय-सीमा के बिल्कुल नजदीक आने के बावजूद प्रशासनिक फाइलों की चाल कछुए से भी धीमी है। सैनी ने कहा, “अधिकारियों का यह नकारात्मक और उपेक्षापूर्ण रवैया साफ जाहिर करता है कि उन्हें कर्मचारियों के हितों और मुख्यमंत्री की साख की कोई परवाह नहीं है।” इसके अलावा, HPGCL के साथ हुए लिखित समझौते को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिसे लेकर प्रदेश भर के बिजली घरों में प्रबंधन के खिलाफ रोष की लहर है।

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5 साल से थमा है वेतन, कमरतोड़ महंगाई में कर्मचारियों के पेट पर लात मारने की कोशिश

संघ ने विभाग रोल पर काम कर रहे उन तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारियों की सुध लेने की पुरजोर वकालत की है, जिनका मानदेय पिछले आधा दशक (5 साल) से एक ही जगह स्थिर है। पदाधिकारियों ने कहा कि इस दौर में जहां रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं बिजली विभाग को अपनी सेवाएं देने वाले इन युवाओं के वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी न करना सीधे तौर पर उनके पेट पर लात मारने जैसा है। संघ ने दोटूक कहा कि एक तरफ तो सरकार ‘श्रमिक सम्मान’ का ढोल पीटती है, और दूसरी तरफ अपनी जान जोखिम में डालकर चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति बहाल रखने वाले जांबाज लाइनमैनों और ऑपरेटरों को आर्थिक तंगी के गर्त में धकेल रही है।

‘हथेली पर जान, पर न रिस्क अलाउंस न सुरक्षा’— आर-पार की लड़ाई के मूड में विद्युत कर्मचारी

आए दिन ड्यूटी के दौरान खंभों और ट्रांसफार्मरों पर हो रहे जानलेवा हादसों और बिजली कर्मचारियों की अकाल मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने की मांग की है। साझा बयान में कहा गया कि कर्मचारी बेहद कठिन परिस्थितियों में बिजली लाइनों को दुरुस्त रखते हैं, लेकिन दुर्घटना की स्थिति में मिलने वाला रिस्क अलाउंस (Risk Allowance), मेडिकल अलाउंस और मृत्यु दावा (Death Claim) की राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

संघ ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 15 जून तक उनकी मांगों को अमलीजामा नहीं पहनाया गया, तो पूरे हरियाणा में एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस वजह से यदि राज्य की विद्युत व्यवस्था प्रभावित होती है या जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़ता है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी केवल और केवल हरियाणा सरकार और हठधर्मी प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।

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