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Haryana Paddy Scam : कुरुक्षेत्र धान घोटाला: ₹5.81 करोड़ की हेराफेरी में पिहोवा में पहली FIR, फूड इंस्पेक्टर सस्पेंड

AAmandeep Singh
कुरुक्षेत्र धान घोटाला: ₹5.81 करोड़ की हेराफेरी में पिहोवा में पहली FIR, फूड इंस्पेक्टर सस्पेंड
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा की मंडियों में धान की ‘कागजी खरीद’ और फिजिकल वेरिफिकेशन में होने वाली हेराफेरी का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। कुरुक्षेत्र जिले की पिपली मंडी से लेकर पिहोवा के नीमवाला तक, विभाग की जांच ने सरकारी सिस्टम में बैठे सफेदपोशों और राइस मिलर्स की सांठगांठ की पोल खोल दी है। मामला इतना गंभीर है कि खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने पिपली के फूड सप्लाई इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर उनका बोरिया-बिस्तर पलवल के लिए बांध दिया है।

अज्ञात आईडी और गायब लोकेशन: ऐसे रचा गया ‘गेट पास’ का मायाजाल

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इस पूरे घोटाले की पटकथा पिछले साल 6 अक्टूबर को लिखी गई थी। पिपली अनाज मंडी में अचानक एक ही दिन में बड़ी संख्या में गेट पास जारी हुए। हैरान करने वाली बात यह थी कि ये पास किसी अज्ञात आईडी से काटे गए थे और इनकी डिजिटल लोकेशन मंडी के दायरे से कोसों दूर मिली। विभागीय जांच में अंदेशा जताया गया कि बिना धान की आवक के ही कागजों में उसे दुकानों से उठाकर राइस मिलों तक पहुंचा हुआ दिखा दिया गया। इस ‘हवाई’ ट्रांजेक्शन का असर यह हुआ कि विभाग ने करीब 27 आढ़तियों का 3 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया, जिससे मंडी में हड़कंप मच गया।

पिहोवा में ₹5.81 करोड़ की चपत: राइस मिल में धान के बजाय मिला सन्नाटा

धान घोटाले की सबसे बड़ी आंच पिहोवा के नीमवाला गांव स्थित एक राइस मिल तक पहुंची है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) की टीम ने जब यहां स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मिल में जो धान होना चाहिए था, मौके पर उसमें 24,318.75 क्विंटल की भारी कमी पाई गई। एमएसपी के हिसाब से इस गायब धान की कीमत लगभग 5 करोड़ 81 लाख रुपये बैठती है। इस बड़ी रिकवरी और हेराफेरी को देखते हुए थाना सदर पिहोवा में मिल मालिक के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की गई है।

सियासत से सचिवालय तक हलचल: इंस्पेक्टर का अपना दावा

पिपली मंडी के आढ़तियों ने जब देखा कि उनकी ईमानदारी की कमाई भी इस घोटाले की भेंट चढ़ रही है, तो वे सीधे चंडीगढ़ जा पहुंचे। मुख्यमंत्री नायब सैनी और खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेश नागर से मुलाकात के बाद जांच में तेजी आई। हालांकि, सस्पेंड किए गए इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने खुद तकनीकी गड़बड़ी की सूचना उच्चाधिकारियों को दी थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर सिस्टम में सेंध लगी, तो उस वक्त निगरानी का जिम्मा संभाल रहे अधिकारी क्या कर रहे थे? फिलहाल पुलिस और विभाग की टीमें उन ‘अज्ञात आईडी’ के मालिकों को खोजने में जुटी हैं, जिन्होंने सरकारी पोर्टल पर यह सेंधमारी की।

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