Haryana Politics: हरियाणा की सियासत में इन दिनों बयानों के तीर और गुप्त मुलाकातों का दौर तेजी से चल रहा है। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के परिवार के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। ( haryana politics news) हाल ही में पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह द्वारा सिरसा में दिए गए एक तीखे बयान के जवाब में विधायक गोकुल सेतिया ने उन्हें एक सप्ताह के भीतर उचाना आने की खुली चुनौती दी थी। इसी गर्मागरम माहौल के बीच कांग्रेस से निष्कासित नेता वीरेंद्र घोघड़िया की विधायक गोकुल सेतिया से हुई मुलाकात ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे आने वाले दिनों में उचाना की धरती पर बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। चर्चा है कि विधायक गोकुल सेतिया बहुत जल्द उचाना हलके में कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं, जिसे उनके विरोधी खेमे के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं वीरेंद्र घोघड़िया और क्या है उनका सियासी सफर?
वीरेंद्र घोघड़िया कभी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाते थे। वे साल 2017 में उचाना मार्केट कमेटी के चेयरमैन भी रह चुके हैं। (uchana assembly seat haryana) हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे से नाराजगी के चलते समीकरण पूरी तरह बदल गए। कांग्रेस द्वारा बृजेंद्र सिंह को उचाना से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद वीरेंद्र घोघड़िया ने पार्टी से बगावत कर दी और निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए थे।
इस बगावत का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला और अंततः बीजेपी उम्मीदवार देवेंद्र अत्री ने उचाना सीट पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे। चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में कांग्रेस हाईकमान ने वीरेंद्र घोघड़िया को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
सोशल मीडिया पर भिड़े समर्थक, पार्टी विरोध के लग रहे आरोप
जैसे ही विधायक गोकुल सेतिया ने वीरेंद्र घोघड़िया के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, वैसे ही उस पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इस मेल-मिलाप पर कड़ी आपत्ति जताई है। (gokul setia vs birender singh)
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए बलवान सांचला नामक यूजर ने लिखा कि यह नेता अगला चुनाव बीजेपी के इशारे पर लड़ने की तैयारी कर रहा है। वहीं, गुरदीप सिपानवाला ने कमेंट किया कि विरोध बीजेपी का होना चाहिए, न कि अपनी ही पार्टी के भीतर सेंधमारी का। अजीत सिंह और कुलदीप बैजलपुरिया जैसे समर्थकों ने भी पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और पिछली हार के कारणों पर सवाल उठाए हैं। कई यूजर्स ने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए चेतावनी दी है कि विरोधी खेमे के नेताओं से इस तरह की नजदीकियां पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। बहरहाल, इस मुलाकात के बाद से हरियाणा कांग्रेस में अंदरखाने हलचल काफी तेज हो गई है।
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