Haryana Power Strike: हरियाणा की ऊर्जा सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली सप्लाई का जिम्मा निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को सौंपे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। हालात की नजाकत को भांपते हुए सरकार ने भी कमर कस ली है और हड़ताल से पहले ही बिजली निगम के 25 अधिकारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। इन सभी अधिकारियों को तुरंत अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री का बड़ा कदम, अपीलीय न्यायाधिकरण में जाएगी सरकार
बढ़ते विरोध के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रशासनिक सचिवों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार हर कदम पर अपने कर्मचारियों के साथ खड़ी है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के इस फैसले के खिलाफ सरकार अब विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) का दरवाजा खटखटाएगी। इतना ही नहीं, सरकार ने कर्मचारियों को यह भी भरोसा दिया है कि वे अपनी पसंद का वकील इस कानूनी लड़ाई के लिए चुन सकते हैं, जिसका खर्च सरकार उठाएगी। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर आने की अपील की है।
ऊर्जा मंत्री की पहल बेअसर, संघर्ष मोर्चा ने ठुकराया न्योता
संकट को थामने की कोशिशों के तहत ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बुधवार दोपहर बिजली कर्मचारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस बैठक में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। मोर्चा की तरफ से हवाला दिया गया कि बुलावा बेहद कम समय के नोटिस पर भेजा गया था, साथ ही कई वरिष्ठ पदाधिकारी अस्वस्थ हैं और उनकी पहले से कुछ व्यस्तताएं तय थीं। ऊर्जा मंत्री का कहना है कि सरकार पांच से छह दिन के भीतर इस मामले में कानूनी अपील दायर कर अदालत से स्टे लेने का पूरा प्रयास करेगी।
क्यों हो रहा है निजीकरण का विरोध और क्या है कंपनी का पक्ष?
विवाद की जड़ में एचईआरसी और एक्सपर्ट कमेटी का वह फैसला है जिसके तहत इलेवन पावर कंपनी को लाइसेंस दिया गया है। पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक निगम की कमेटी ने पाया था कि कंपनी पूंजी पर्याप्तता और क्रेडिट वर्थनेस के सभी मानदंडों पर खरी उतरती है। कंपनी का प्लान गुरुग्राम जैसे घने इलाकों में 33 kV प्राइमरी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और गैस-इंसुलेटेड कॉम्पैक्ट सब-स्टेशन लगाने का है, जिससे फॉल्ट कम हों।
दूसरी ओर, कर्मचारियों का तर्क बिल्कुल अलग है। उनका मानना है कि कंपनी राज्य के सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इलाकों यानी मलाईदार हिस्सों में कारोबार करेगी, जबकि घाटे वाले ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों का बोझ सरकारी निगमों पर छोड़ दिया जाएगा। कर्मचारियों को डर है कि इससे बिजली महंगी होगी और प्रदेश के करीब 40,000 नियमित, कच्चे और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तथा इंजीनियरों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

