शिमला में चुनाव विभाग कार्यालय के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, दीवार पर लिखा ‘वोट चोर’; CEC का पुतला फूंका
हिमाचल में SIR के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन
Himachal Congress SIR Protest: मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर हिमाचल कांग्रेस ने शुक्रवार को शिमला में चुनाव विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कसुम्पटी स्थित कार्यालय के बाहर जुटे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्यालय की दीवारों पर ‘वोट चोर’ जैसे नारे लिखकर विरोध जताया। प्रदर्शन को लेकर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पार्टी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई।
कांग्रेस लंबे समय से SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और नाम जोड़ने तथा हटाने की प्रक्रिया में पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। शिमला में प्रदर्शन से पहले प्रदेश कांग्रेस ने कहा था कि पार्टी SIR से जुड़े मुद्दों, नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form-6 में बदलाव और मतदाता डाटा के केंद्रीकरण को लेकर स्पष्टीकरण चाहती है। कांग्रेस ने हाल में सामने आई चुनाव आयोग के भीतर की आपत्तियों की रिपोर्ट को भी अपने आरोपों के समर्थन में उठाया है। हालांकि, इन मुद्दों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी हासिल थी।
10 महीने में 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, चुनावी डाटा तक पहुंच तथा कुछ प्रक्रियात्मक फैसले शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ आपत्तियों में Form-6 में बदलाव और मतदाता डाटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए गए थे। दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट में उठाए गए मतभेदों की व्याख्या से असहमति जताते हुए कहा है कि SIR और अन्य फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
रजनी पाटिल ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन में हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल भी शामिल रहीं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में SIR और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के आरोप दोहराए। पाटिल ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाती रहेगी। पाटिल ने चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में लिए जा रहे फैसलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनके कुछ बयानों में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बेहद तीखी राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल भी किया गया। कांग्रेस नेताओं के ऐसे आरोप पार्टी का राजनीतिक रुख हैं। इन्हें चुनाव आयोग की ओर से स्थापित तथ्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है। चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध स्पष्टीकरण में SIR समेत फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिया जाना बताया गया है।
हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने प्रदर्शन के दौरान आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके मुताबिक, SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस आने वाले दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी प्रदर्शन करेगी। पार्टी की प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक भी 25 सितंबर को शिमला स्थित राजीव भवन में निर्धारित थी। इसमें संगठन की आगामी रणनीति पर चर्चा होनी है। कांग्रेस की ओर से पहले ही कहा गया था कि इस बैठक में आगे के कार्यक्रमों को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। इस बीच यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की मौजूदगी को लेकर पहले जारी कार्यक्रम और मौके की स्थिति में अंतर रहा। प्रदर्शन की पूर्व घोषणा में मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई थी, जबकि मौके की रिपोर्टों में प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और पार्टी के अन्य नेताओं-कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की पुष्टि हुई।
