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Nishant Mehta Cyclist: हिसार के निशांत मेहता ने 4000 किमी साइकिल चलाकर जीता दुनिया का सबसे कठिन ‘नॉर्थकेप-4000’ चैलेंज

AAmandeep Singh
Nishant Mehta Cyclist: हिसार के निशांत मेहता ने 4000 किमी साइकिल चलाकर जीता दुनिया का सबसे कठिन 'नॉर्थकेप-4000' चैलेंज

हिसार के निशांत मेहता ने 4000 किमी साइकिल चलाकर जीता दुनिया का सबसे कठिन ‘नॉर्थकेप-4000’ चैलेंज

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Nishant Mehta Cyclist: जुनून, अदम्य इच्छाशक्ति और फौलादी इरादों के बल पर हिसार के 46 वर्षीय साइकिलिस्ट निशांत मेहता ने वैश्विक मंच पर भारत और हरियाणा का नाम रोशन किया है। निशांत ने दुनिया की सबसे कठिन और लंबी दूरी की साइकिलिंग चुनौतियों में गिनी जाने वाली ‘नॉर्थकेप-4000’ को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इटली के रोवेरटो शहर से शुरू होकर नॉर्वे के सुदूर उत्तरी छोर नॉर्थ केप तक पहुंची यह महायात्रा लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी थी। इस बेहद खतरनाक अभियान को फतह करने वाले निशांत हरियाणा के पहले साइकिलिस्ट बन गए हैं।

आर्कटिक की हाड़ कंपाने वाली ठंड में पार कीं 8 देशों की सीमाएं

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निशांत का यह सफर सिर्फ दो पहियों पर दूरी तय करने भर का नहीं था, बल्कि आठ देशों की अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और खतरनाक मौसम से दो-चार होने की जंग थी। अपने अभियान के दौरान उन्होंने इटली से पेडल मारना शुरू किया और ऑस्ट्रिया, जर्मनी, चेक गणराज्य, पोलैंड, स्वीडन, फिनलैंड से होते हुए नॉर्वे पहुंचे। वर्ष 2026 के आधिकारिक प्रतिभागी रिकॉर्ड के अनुसार भारत से इस एडवेंचर के लिए कुल 8 साइकिलिस्टों का चयन हुआ था, जिनमें से केवल 6 ही सभी बाधाओं को पार करते हुए फिनिश लाइन तक पहुंच सके।

माउंट एवरेस्ट से तीन गुना ज्यादा चढ़ाई, मौसम ने ली कड़ी परीक्षा

इस यात्रा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 4,000 किलोमीटर के इस लंबे रूट पर निशांत को लगभग 28,800 मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ी। यह समुद्र तल से माउंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई से 3.25 गुना अधिक है। चढ़ाइयों के अलावा मूसलाधार बारिश, आर्कटिक क्षेत्र की जमा देने वाली बर्फीली हवाओं और शून्य से नीचे के तापमान ने निशांत के हौसले की कड़ी परीक्षा ली। कई दफा तेज हवाओं के बीच साइकिल पर संतुलन बनाना तक दूभर हो गया था, लेकिन उनका ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर रहा।

उम्र को महज एक आंकड़ा साबित करते हुए 46 वर्षीय निशांत ने अपनी सफलता से युवाओं को नया संदेश दिया है। वे पहले भी 1,200 किलोमीटर की ऐतिहासिक ‘पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस’ प्रतियोगिता पूरी कर चुके हैं और लगातार 10 बार ‘सुपर रैंडोन्यूर’ का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक अभियान को पूरा करने के बाद जब वे हिसार लौटे तो ‘हिसार रोडीज क्लब’ के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और केक काटकर उनका जोरदार नागरिक अभिनंदन किया।

अपनी इस अविश्वसनीय यात्रा पर बात करते हुए निशांत मेहता ने कहा, “यह सिर्फ 4,000 किलोमीटर की यात्रा नहीं थी, बल्कि 4,000 बार खुद के भीतर छिपे डर को हराने का सफर था। मौसम और शारीरिक थकावट ने कई बार तोड़ा, लेकिन दिमाग में बस एक ही बात थी कि अगर हम लगातार पेडल मारते रहें तो रास्ता कितना भी लंबा क्यों न हो, मंजिल मिल ही जाती है।”

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