Homeopathy Rules अंबाला। किसी क्रॉनिक बीमारी या लंबे समय से चली आ रही समस्या से परेशान होकर मरीज बड़ी उम्मीद के साथ होम्योपैथिक क्लिनिक का रुख करते हैं। लेकिन कई बार महीनों तक गोलियां खाने के बाद जब मनमुताबिक नतीजा नहीं मिलता, तो लोग अक्सर यही कहते सुने जाते हैं कि ‘हमें तो होम्योपैथी से कोई फायदा ही नहीं हुआ।’
हालांकि, अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में कार्यरत सीनियर होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. रजिता इस धारणा से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखतीं। उनका कहना है कि दिक्कत दवा में नहीं, बल्कि उसे लेने के तरीके और मरीजों की बेपरवाही में छिपी होती है।
दवा लेने के तुरंत बाद चाय-पानी पीना पड़ सकता है भारी
डॉ. रजिता बताती हैं कि होम्योपैथिक दवाइयों के असर करने का विज्ञान बेहद संवेदनशील होता है। हर दवा के सेवन का समय तय होता है। कुछ दवाएं खाली पेट ली जाती हैं, तो कुछ को खाना खाने से 20 मिनट पहले या 20 मिनट बाद लेना जरूरी होता है।
इस 20 मिनट के अंतराल के दौरान पानी पीने तक से बचने की हिदायत दी जाती है। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जल्दबाजी में गोलियां खाकर तुरंत चाय, कॉफी या पानी गटक लेते हैं। मुंह के भीतर मौजूद रसायनों की वजह से दवा अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाती।
हाथ से छूने की गलती और रखने का गलत तरीका
दवा के रखरखाव को लेकर भी लोग अक्सर बड़ी गलतियां करते हैं। डॉ. रजिता के मुताबिक, होम्योपैथिक मीठी गोलियों या ड्रॉप्स को हमेशा धूप, तेज गर्मी और किसी भी तरह की तेज गंध वाली चीजों से दूर रखना चाहिए। शीशी का ढक्कन खुला छोड़ देने से दवा का असर हवा में उड़ जाता है।
इसके अलावा, कई मरीज गोलियों को हथेली पर निकालकर सीधे मुंह में डाल लेते हैं। सही तरीका यह है कि दवा को शीशी के ढक्कन या एक साफ चम्मच की मदद से ही मुंह में लें और चबाने या निगलने के बजाय जीभ के नीचे रखकर धीरे-धीरे घुलने दें।
खान-पान का परहेज और बच्चों की बिगड़ी दिनचर्या
इलाज के दौरान तीखी गंध वाले पदार्थों जैसे कच्चा प्याज, लहसुन, हींग, अदरक और इलायची से सख्त परहेज करने की सलाह दी जाती है। वहीं, आजकल बच्चों में मैगी, पास्ता, चाउमीन और तला-भुना जंक फूड खाने की लत भी इलाज की प्रक्रिया में रोड़ा अटकाती है।
डॉक्टर का कहना है कि सिर्फ समय पर दवा दे देना ही काफी नहीं है। देर रात तक मोबाइल स्क्रीन देखना, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों का न होना शरीर की रिकवरी को धीमा कर देता है। दवा के साथ-साथ सुबह हल्का व्यायाम या योग करना बेहद जरूरी है।
गूगल देखकर खुद दवा लेना सबसे खतरनाक
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में एक और नया ट्रेंड सामने आया है- ‘सेल्फ मेडिकेशन’। लोग बीमारियों के लक्षण पढ़कर ऑनलाइन दवाओं के नाम ढूंढते हैं और खुद ही मेडिकल स्टोर से खरीदकर खाने लगते हैं। डॉ. रजिता चेतावनी देती हैं कि बिना विशेषज्ञ की सलाह के ली गई होम्योपैथिक दवाएं शरीर के इम्यून सिस्टम को बिगाड़ सकती हैं।
संयम, अनुशासन और सही परहेज ही होम्योपैथिक इलाज की असली कुंजी हैं। जब मरीज दवा के साथ इन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करता है, तो पुरानी से पुरानी बीमारी से भी स्थाई निजात मिल जाती है।
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