Panchkula News: हरियाणा के पंचकूला स्थित एक सरकारी स्कूल में दो नाबालिग बच्चों के बीच हुई हिंसक घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। KG में पढ़ने वाली 6 वर्षीय छात्रा पर तीसरी कक्षा के 8 वर्षीय छात्र ने ईंट से हमला कर दिया। इस घटना में बच्ची के चेहरे पर चोट आई और उसकी नाक की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। बच्ची को इलाज के लिए PGI में भर्ती कराया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद शनिवार दोपहर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में पेरेंट्स स्कूल के बाहर जमा होकर प्रदर्शन करने लगे।
घटना से नाराज अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण इतनी गंभीर घटना हुई और स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले दूसरे बच्चे भी इस घटना के बाद डरे हुए हैं। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। हंगामा बढ़ता देख स्कूल प्रशासन ने मुख्य गेट बंद कर दिया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत भी प्राप्त कर ली है।
PGI में भर्ती बच्ची की नाक की हड्डी में फ्रैक्चर
घायल छात्रा का इलाज PGI में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची पर ईंट से वार किए गए थे। हमले में उसके चेहरे पर चोट आई और नाक की हड्डी टूट गई। इस घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। स्कूल में छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और उनकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों की मांग है कि घटना की पूरी जांच हो और स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने घटना की जानकारी ली और कहा कि आयोग इस मामले का गंभीरता से अध्ययन करेगा। जस्टिस बत्रा ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की मानसिकता और व्यवहार को समझने के लिए एक विशेष व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश सरकार से की जाएगी। इस व्यवस्था के जरिए बच्चों के व्यवहार का समय रहते आकलन किया जा सकेगा, ताकि किसी भी बच्चे के असामान्य व्यवहार को समझकर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति को समझना जरूरी है। स्कूलों में ऐसी व्यवस्था विकसित करने से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
बाल अधिकार आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा नोटिस
मामले में हरियाणा बाल अधिकार आयोग ने भी खुद संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर घटना पर जवाब मांगा है। आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति हरिपाल श्योराण PGI पहुंचीं और वहां भर्ती बच्ची का हाल जाना। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में बच्ची के स्वास्थ्य की जानकारी ली। बाल अधिकार आयोग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी से जवाब मांगे जाने के बाद अब स्कूल प्रशासन की भूमिका और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर भी जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित बच्ची के परिजनों की शिकायत मिल चुकी है। जिस छात्र पर हमला करने का आरोप है, उसकी उम्र 8 साल है और वह नाबालिग है। मामले में पुलिस ने डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों से भी राय मांगी है। चूंकि दोनों बच्चे कम उम्र के हैं, इसलिए पुलिस मामले को समझने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। यह घटना केवल दो बच्चों के बीच हुए विवाद तक सीमित नहीं है। इससे स्कूलों में छोटे बच्चों की निगरानी, सुरक्षित माहौल और व्यवहार संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करने की जरूरत पर बहस शुरू हो गई है। अब जांच के साथ यह भी देखना होगा कि स्कूल में घटना के समय बच्चों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।

