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HSGMC Controversy: दादूवाल ने थमाया 10 लाख का चेक, झींडा बोले— "जब हम संघर्ष कर रहे थे, तब तुम पैदा भी नहीं हुए थे"

GGaganpreet Kaur
दादूवाल ने थमाया 10 लाख का चेक, झींडा बोले— "जब हम संघर्ष कर रहे थे, तब तुम पैदा भी नहीं हुए थे"
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा के सिख समाज की सर्वोच्च संस्था HSGMC इस समय धार्मिक मामलों से ज्यादा अपनी अंदरूनी जंग को लेकर चर्चा में है। कुरुक्षेत्र में आज उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब पूर्व प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल मीडिया के सामने आए। दरअसल, मौजूदा प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने पिछले दिनों एक बयान दिया था कि कमेटी की माली हालत इतनी खराब है कि गुरु घर के लंगर के लिए सब्जी खरीदने तक के पैसे नहीं हैं।

झींडा के इसी बयान को ढाल बनाकर दादूवाल ने आज कमेटी के चीफ अकाउंट ऑफिसर गुरविंदर सिंह को 10 लाख रुपये का चेक सौंप दिया। दादूवाल ने कहा कि गुरु के लंगर में कभी किसी चीज की कमी नहीं हो सकती और वर्तमान प्रधान महज अपनी नाकामी छुपाने के लिए संगत को गुमराह कर रहे हैं।

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“झींडा को डक्के का नहीं पता, सुखबीर बादल की गोद में बैठे हैं”

पत्रकारों से रूबरू दादूवाल यहीं नहीं रुके, उन्होंने शाहाबाद के प्रतिष्ठित मीरी-पीरी संस्थान के मुद्दे पर झींडा को बुरी तरह घेरा। दादूवाल ने आरोप लगाया, “संस्थान के मामले को लेकर प्रधान झींडा को डक्के का (कुछ भी) पता नहीं है। वे सिर्फ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और सुखबीर सिंह बादल की भाषा बोल रहे हैं।”

दादूवाल ने दावा किया कि जब कोर्ट में इस संस्थान को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी, तब झींडा कभी चंडीगढ़ हाईकोर्ट नहीं गए। उन्हें अपने वकील और केस के स्टेटस तक की जानकारी नहीं थी। अब जब फैसला आ गया है, तो वे वहां जाकर बैठ गए हैं और कह रहे हैं कि उनसे संस्थान संभल नहीं रहा। दादूवाल ने मांग की कि जब तक मैनेजमेंट आधिकारिक रूप से हरियाणा कमेटी के पास नहीं आता, तब तक कर्मचारियों और डॉक्टरों की रुकी हुई तनख्वाह अमृतसर की SGPC को जारी करनी चाहिए क्योंकि अतीत में वही वहां से लोन उठाकर ले गए हैं।

“दादूवाल तब पैदा भी नहीं हुए थे..” झींडा का करारा पलटवार

दादूवाल के आरोपों की झड़ी के कुछ ही देर बाद वर्तमान प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने भी एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। दादूवाल के ‘डक्के का ज्ञान न होने’ वाले तंज पर झींडा का दर्द और गुस्सा साफ झलका। उन्होंने अपने पुराने तेवर दिखाते हुए पंजाबी में कहा, “दादूवाल ओदो जम्या वी नी सी, अस्सी ओदो दे संघर्ष कर रहे है।” (जब हरियाणा कमेटी के गठन के लिए हम लाठियां खा रहे थे और संघर्ष कर रहे थे, तब दादूवाल का इस राजनीति में वजूद भी नहीं था।)

झींडा ने दादूवाल की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगत सब देख रही है कि कौन गुरु घर की सेवा कर रहा है और कौन राजनीति। उन्होंने दादूवाल को ललकारते हुए कहा कि वे मीडिया में सुर्खियां बटोरने के बजाय पहले यह हिसाब दें कि उनके पास यह पैसा कहां से आ रहा है? दादूवाल को आज के 10 लाख और इससे पहले दिए गए 12 लाख रुपये का पूरा हिसाब संगत के सामने रखना चाहिए।

सरकार के दखल पर आपत्ति और बजट का संकट

मीरी-पीरी संस्थान के विवाद पर झींडा ने आरोप लगाया कि कोर्ट का फैसला आने से पहले ही दादूवाल वहां जाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे, जहां से उन्हें बेइज्जत होकर निकलना पड़ा। इसके साथ ही झींडा ने सरकार को भी लपेटे में लिया। उन्होंने दोटूक कहा, “यह गुरु घर के प्रबंधन की संस्था है, कोई राजनीतिक दल नहीं। सरकार को हमारे अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी (इंटरफेयर) बंद करनी चाहिए।”

इस पूरी नूराकुश्ती का सीधा खामियाजा कमेटी के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता दिख रहा है। आज कमेटी का बजट पास करने के लिए विशेष इजलास (बैठक) बुलाया गया था। लेकिन अंदरूनी गुटबाजी के चलते कुल सदस्यों में से केवल 28 सदस्य ही कुरुक्षेत्र पहुंचे। कोरम पूरा न होने के कारण न तो बजट पास हो सका और न ही मीरी-पीरी संस्थान को अपने अधीन लेने के लिए जरूरी ‘एग्जीक्यूटिव बॉडी’ या बोर्ड का गठन हो पाया। साफ है कि आने वाले दिनों में यह धार्मिक और राजनीतिक रार थामने वाली नहीं है।

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