Indian Railways: दिवाली, छठ, दुर्गा पूजा और होली जैसे देश के बड़े त्योहारों का खुमार शुरू होते ही देश भर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों का हुजूम उमड़ने लगता है। अपने घर पहुंचने की होड़ में नियमित (रेगुलर) ट्रेनों की सीटें महीनों पहले ही फुल हो जाती हैं और स्लीपर से लेकर एसी कोच तक में लंबी वेटिंग लिस्ट देखने को मिलती है। यात्रियों की इसी भारी भीड़ को संभालने और आम जनता को त्योहार पर घर पहुंचाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे हर साल हजारों ‘फेस्टिवल स्पेशल’ ट्रेनें पटरी पर उतारता है। लेकिन अक्सर आम मुसाफिरों के मन में यह सवाल उठता है कि सामान्य ट्रेन और स्पेशल ट्रेन में मूल अंतर क्या है और किसमें सफर करना ज्यादा मुफीद रहेगा?
किराए का गणित: स्पेशल ट्रेन की जेब पर कितनी पड़ती है मार?
सामान्य ट्रेनों का किराया रेलवे की मानक मूल्य प्रणाली के आधार पर तय होता है, जो काफी हद तक रियायती और स्थिर होता है। इसके विपरीत, फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य किराए से 10 से 30 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है। स्पेशल ट्रेनों को चलाने में आने वाली अतिरिक्त परिचालन लागत (Operational Cost) और dynamic/special श्रेणी के नियमों के कारण इनका किराया थोड़ा ज्यादा रहता है। ऐसे में आईआरसीटीसी (IRCTC) ऐप या काउंटर से टिकट बुक करते समय किराए की तुलना जरूर कर लेनी चाहिए।
रफ्तार और लेटलतीफी: स्पेशल ट्रेनों को क्यों रुकना पड़ता है आउटर पर?
ट्रेन की स्पीड और समय की पाबंदी के मामले में नियमित ट्रेनों का पलड़ा हमेशा भारी रहता है। सामान्य ट्रेनें पहले से निर्धारित टाइम-टेबल के अनुसार चलती हैं और उन्हें रेल नेटवर्क पर प्राथमिकता (Priority) दी जाती है। दूसरी ओर, स्पेशल ट्रेनों को अतिरिक्त लोड संभालने के लिए सीमित समय के लिए चलाया जाता है। यही वजह है कि व्यस्त रेल रूटों पर सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेनों को पास देने के लिए स्पेशल ट्रेनों को अक्सर लूप लाइनों या स्टेशनों के आउटर पर रोक दिया जाता है, जिससे इनके गंतव्य तक पहुंचने में देरी की संभावना बढ़ जाती है।
आपके लिए कौन-सा विकल्प है सबसे मुफीद?
अगर आप अपनी यात्रा का प्लान दो-तीन महीने पहले बना रहे हैं और सामान्य ट्रेन में कन्फर्म सीट या कम वेटिंग मिल रही है, तो रेगुलर ट्रेन ही आपकी पहली पसंद होनी चाहिए। इससे न केवल आपके पैसे बचेंगे, बल्कि आप समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। हालांकि, अगर त्योहार के बिल्कुल मुहाने पर आपको सामान्य ट्रेनों में ‘नो-रूम’ या लंबी वेटिंग दिख रही है, तो फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। थोड़ा अधिक किराया देकर कम से कम आपको कन्फर्म सीट के साथ सफर करने का मौका मिल जाता है।
यूपी-बिहार रूटों पर सबसे ज्यादा मांग, ऐसे करें स्मार्ट बुकिंग
खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वांचल की ओर जाने वाली ट्रेनों में त्योहारों के दौरान सबसे ज्यादा मारामारी रहती है। रेलवे भी दिल्ली, मुंबई, सूरत और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से इन्हीं रूटों पर सबसे ज्यादा स्पेशल गाड़ियां चलाता है। अगर आप भी इस त्योहारी सीजन में घर जाने की तैयारी में हैं, तो रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, आईआरसीटीसी ऐप या ‘नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम’ (NTES) पर जाकर स्पेशल ट्रेनों की सूची, सीट की उपलब्धता और रूट की समय-सारणी समय-समय पर चेक करते रहें।
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