Longest Train Journey: रेल की खिड़की से बाहर भागते पेड़, बादलों से घिरे पहाड़, छोटे-छोटे देहाती स्टेशन और बदलते हुए शहर—लंबी ट्रेन यात्रा का रोमांच ही कुछ अलग होता है। कई बार सफर इतना लंबा और दिलचस्प होता है कि रास्ते में ही देश की अलग-अलग संस्कृतियों और रहन-सहन को करीब से देखने का मौका मिल जाता है।
अगर आप भी ऐसी ही किसी महा-यात्रा के शौकीन हैं, तो भारत की एक ऐसी ट्रेन के बारे में जानिए जो देश के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में तीन दिन से भी ज्यादा का वक्त लेती है। (Dibrugarh to Kanyakumari train) हम बात कर रहे हैं मशहूर ‘विवेक एक्सप्रेस’ की, जो पूर्वोत्तर के छोर यानी असम के डिब्रूगढ़ से शुरू होकर दक्षिण के आखिरी छोर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक का सफर तय करती है।
सात राज्यों और 59 स्टेशनों से गुजरता है कारवां
विवेक एक्सप्रेस का यह सफर महज़ एक रेल यात्रा नहीं, बल्कि भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का एक जीता-जागता दस्तावेज है। डिब्रूगढ़ से चलकर कन्याकुमारी पहुंचने वाली यह ट्रेन अपने कुल सफर के दौरान (longest train route in India) देश के 7 राज्यों—असम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल से होकर गुजरती है।
इस लंबी यात्रा में ट्रेन कुल 59 स्टेशनों पर रुकती है। रास्ते में तिनसुकिया, दीमापुर, गुवाहाटी, अलीपुरद्वार, मालदा, खड़गपुर, कटक, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, वेल्लोर, सेलम, कोयंबटूर, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम जैसे तमाम बड़े और छोटे शहर आते हैं। कहीं चाय के हरे-भरे बागान तो कहीं समुद्र तट और नारियल के पेड़, इस सफर में नजारों का ऐसा बदलाव देखने को मिलता है जो शायद ही किसी अन्य रूट पर मिले।
स्वामी विवेकानंद के नाम से जुड़ी है यह ट्रेन
इस प्रतिष्ठित ट्रेन का नाम भारतीय संस्कृति के महान दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद के सम्मान में रखा गया है। साल 2011-12 के रेल बजट में इसकी शुरुआत की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती वर्ष को यादगार बनाना था।
आज यह ट्रेन अपने विशाल रूट और अनूठे सफर के कारण पूरी दुनिया में अपनी एक खास पहचान रखती है। हालांकि, दूरी के मामले में इसके बाद दूसरा नंबर ‘हिमसागर एक्सप्रेस’ का आता है, जो कटरा से चलकर कन्याकुमारी तक जाती है, लेकिन सबसे लंबे सफर का रिकॉर्ड आज भी विवेक एक्सप्रेस के ही नाम दर्ज है।
खूबसूरत नजारों के बीच सफर की अपनी चुनौतियां
चौहत्तर घंटे यानी तीन दिन से ज्यादा समय तक पटरियों पर दौड़ने वाली इस ट्रेन का सफर जितना रोमांचक है, इसकी अपनी कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। (Vivek Express 74 hours journey) इतने लंबे सफर के दौरान ट्रेन के भीतर लंबी भीड़, खानपान, साफ-सफाई और लगातार तीन दिन तक एक ही डिब्बे में बिताना आसान नहीं होता।
कई बार यात्रियों को ऐसी असहजताओं का सामना करना पड़ता है, जिनकी उम्मीद उन्होंने सफर शुरू करने से पहले नहीं की होती। इसके बावजूद, (Indian Railways long distance trains) अगर आप भारत के भूगोल को गहराई से जीना चाहते हैं और कम खर्च में देश के एक सिरे से दूसरे सिरे तक की संस्कृति देखना चाहते हैं, तो विवेक एक्सप्रेस का यह सफर आपके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक साबित हो सकता है।

