Jagtar Singh Hawara: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा (Beant Singh Assassination Case) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह इस संवेदनशील मामले में खुफिया ब्यूरो (IB) से सलाह-मशविरा करे। याचिका में हवारा ने दिल्ली की तिहाड़ जेल से खुद को पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि वह अपने बुजुर्ग परिजनों के करीब रह सके।
फरार होने की आशंका और उच्च जोखिम का हवाला
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत में कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने दलील दी कि हवारा के पास जेल से फरार होने का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। (Supreme Court Hearing Hawara) उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी चंडीगढ़ की जेल में सुरंग खोदने की घटना और अन्य मामलों में संलिप्त रह चुका है।
इसके अलावा, गृह मंत्रालय की उच्च जोखिम वाले कैदियों के स्थानांतरण संबंधी एडवाइजरी और पंजाब सरकार के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि उसे पंजाब भेजा जाता है, तो राज्य की संवेदनशील कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वकीलों की दलीलें और हवारा की उम्र का जिक्र
दूसरी ओर, हवारा की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने दलील दी कि जब यह हत्याकांड हुआ था, तब उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी और इस घटना को बीते हुए 31 साल का लंबा वक्त बीत चुका है। ((Punjab Transfe) ) उन्होंने अदालत को बताया कि हवारा की मां की उम्र अब 82 वर्ष हो चुकी है और उनकी तबीयत बेहद नाजुक है। याचिकाकर्ता का उद्देश्य रिहाई पाना नहीं, बल्कि केवल पंजाब की जेल में शिफ्ट होना है, और जेल के भीतर उनका आचरण पूरी तरह बेदाग रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामle की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वैचारिक कट्टरता और उसके नतीजों का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। अदालत ने कहा कि, “जब आपकी कोई विचारधारा होती है, तो हमें नहीं पता होता कि यह किस तरह सामने आएगी। हर पापी का एक भविष्य होता है।
” बेंच ने यह भी जोड़ा कि भले ही हवारा अब शांत हो गया हो और एक बदला हुआ व्यक्ति बन गया हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट और संभावित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या है बेअंत सिंह हत्याकांड का इतिहास?
गौरतलब है कि 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ सिविल सचिवालय के बाहर एक भीषण बम धमाका हुआ था, जिसमें पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की जान चली गई थी।
इस सनसनीखेज मामले में विशेष अदालत ने 2007 में जगतार सिंह हवारा को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे साल 2010 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। पिछले लगभग तीन दशकों से सलाखों के पीछे बंद हवारा की इस नई याचिका पर अब आईबी की रिपोर्ट के बाद आगामी सुनवाई में फैसला आने की उम्मीद है।
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