Jind Cylinder Blast: जींद जिले के रजाना कलां गांव में शुक्रवार की सुबह रोज की तरह बेहद शांत थी। ग्रामीण अभी सोकर उठे ही थे कि सुबह करीब 5:30 बजे एक जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका गांव के ही एक मकान में हुआ, जहां गैस सिलेंडर फटने से पल भर में भीषण आग लग गई।
लपटें इतनी गगनचुंबी थीं कि तीन मंजिला मकान देखते ही देखते आग के गोले में तब्दील हो गया। आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया। पड़ोसियों और गांव के युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे और लपटों के बीच से सामान निकालने और आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन अंदर फंसी युवती तक पहुंचना नामुमकिन साबित हुआ।
तहलके के बीच बेबस मां ने आंखों के सामने देखा मंजर
यह नियति का क्रूर मजाक ही था कि हादसे के वक्त घर में सिर्फ 22 साल की मनीषा अकेली थी। मनीषा के पिता पानीपत के एक प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं और वहीं थे। वहीं, घुटनों के ऑपरेशन के चलते डॉक्टरों की सलाह पर मनीषा की मां सुबह की सैर के लिए घर से कुछ ही दूरी पर गई हुई थी।
जब वह वॉक से लौटी, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। आंखों के सामने उसका आशियाना जल रहा था और भीतर से बेटी की चीखें आ रही थीं। मनीषा को बेहद गंभीर और झुलसी हुई हालत में पहले सफीदों के नागरिक अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने नाजुक हालत को देखते हुए उसे पानीपत और फिर वहां से पीजीआई रोहतक रेफर किया, लेकिन जख्मों के ताव न झेल पाने के कारण मनीषा ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
आशियाना बना मलबे का ढेर, शादी की खुशियां मातम में बदलीं
धमाके की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घर के शीशे और भारी स्लाइडर गेट उखड़कर कई मीटर दूर जा गिरे। छतें भरभराकर ढह गईं, जिससे सिलाई मशीन, पंखे और घर का तमाम कीमती सामान मलबे के नीचे दफन हो गया। दोपहर बाद तक भी मलबे से सुलगता हुआ धुआं बाहर निकल रहा था।
सूचना मिलने के बाद पुलिस की डायल 112 की टीम और सफीदों से दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बड़ी मशक्कत के बाद लपटों को शांत किया। ग्रामीणों ने सजल आंखों से बताया कि मनीषा विवाह योग्य थी और पिता उसकी शादी की तैयारियों और तिनका-तिनका जोड़कर पैसे जुटाने में लगे थे, लेकिन इस हादसे ने सबकुछ तबाह कर दिया। अब परिवार के पास बदन पर पहनने के लिए कपड़े तक नहीं बचे हैं।
सरपंच और ग्रामीणों ने लगाई मुआवजे की गुहार
इस असहनीय दुख की घड़ी में पूरा रजाना कलां गांव पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने में जुटा है। गांव के सरपंच और मौजिज बुजुर्गों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस बेसहारा हो चुके परिवार के लिए तुरंत विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है।
ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि आपदा राहत कोष के तहत पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर ला सकें और सिर छुपाने के लिए दोबारा एक छत खड़ी कर सकें।

