- रोजगार में बड़ा उछाल: पिछले 6 वर्षों में 13.4 करोड़ नए रोजगार अवसर बने, जो कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुने हैं।
(World Bank Report) नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि गरीबी खत्म करना सरकार के लिए मात्र एक नारा नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प है। वर्ष 2011 से 2023 के बीच देश में 49.6 करोड़ नागरिकों ने गरीबी के दायरे से बाहर निकलकर नया जीवन शुरू किया है। इस दौरान देश में अत्यधिक गरीबी की दर में 90 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए इसे राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों की बड़ी सफलता बताया।
विश्व बैंक की ‘इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में जहां अत्यधिक गरीबी की दर 27.1 प्रतिशत थी, वहीं 2023 में यह घटकर महज 2.6 प्रतिशत पर आ गई। आर्थिक असमानता को मापने वाले गिनी इंडेक्स में भी 20 प्रतिशत से ज्यादा का सुधार दर्ज हुआ और यह 23.0 के स्तर पर आ गया। प्रतिदिन करीब 400 रुपये (4.20 डॉलर) से कम कमाने वाली आबादी भी 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई है, जिसके 2028 तक 12.1 प्रतिशत होने का अनुमान है।
गरीबी घटने के तीन प्रमुख कारण
देश में गरीबी घटने की पहली बड़ी वजह आम नागरिकों की क्रय शक्ति में हुआ ठोस सुधार है। लोगों की कमाई और खर्च करने की क्षमता बेहतर होने से घरेलू स्तर पर आर्थिक स्थिरता आई है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और मजबूत बाजार मांग ने जमीनी स्तर पर सकारात्मक आर्थिक चक्र तैयार किया है।
दूसरी सबसे अहम वजह ग्रामीण महिलाओं का संगठित रोजगार से जुड़ना रही है। वर्ष 2017 से 2023 के बीच बने 13.4 करोड़ नए अवसरों में ग्रामीण महिलाओं ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी निभाई। इसके अलावा मुफ्त राशन और पारदर्शी सरकारी योजनाओं ने कमजोर आय वर्ग को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर गरीबी के दलदल से बाहर निकाला।
बुनियादी सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार
गरीबी में यह कमी केवल नकद आय तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनजीवन के स्तर में भी व्यापक बदलाव आया है। देश के करोड़ों परिवारों तक पक्के मकान, निर्बाध बिजली, नल से स्वच्छ जल, शौचालय और एलपीजी गैस सिलेंडर जैसी सुविधाएं पहुंची हैं।
ऑक्सफोर्ड की रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2005-06 में 53.8 प्रतिशत आबादी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थी, जो 2019-21 तक सिमटकर 16.4 प्रतिशत रह गई। विश्व बैंक के गैर-मौद्रिक गरीबी पैमाने के मुताबिक भी 2022-23 में बुनियादी सुविधाओं से वंचित आबादी घटकर 15.5 प्रतिशत पर आ चुकी है।
क्षेत्रीय असमानता और बेरोजगारी की चुनौतियां
उपलब्धियों के बीच देश के सामने कई गंभीर आर्थिक चुनौतियां भी बरकरार हैं। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल गरीबों का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक के भौगोलिक क्षेत्र में केंद्रित है। इन राज्यों में बेहतर वेतन वाले विनिर्माण और औद्योगिक अवसरों की उपलब्धता बेहद जरूरी बनी हुई है।
इसके साथ ही युवाओं में बेरोजगारी की दर 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 15.9 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसमें ग्रामीण युवतियों की संख्या अधिक है। एक अन्य चिंता यह भी है कि नए बने रोजगारों में बड़ा हिस्सा कम आमदनी वाले असंगठित क्षेत्रों से जुड़ा है, जिससे कुल कामगारों की वास्तविक आय में बड़ा उछाल नहीं आ सका है।

