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Kurukshetra News: 42 डिग्री की धूप में तड़प रहा था बगुले का बच्चा, दुकानदार बना फरिश्ता

AAmandeep Singh
Kurukshetra News: 42 डिग्री की धूप में तड़प रहा था बगुले का बच्चा, दुकानदार बना फरिश्ता
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ज्योतिसर (पवन शर्मा): जेठ की तपती दुपहरी और आसमान से बरसती आग ने इन दिनों उत्तर भारत समेत हरियाणा में हाहाकार मचा रखा है। बुधवार को कुरुक्षेत्र का ज्योतिसर इलाका भी भीषण गर्मी की मार झेल रहा था, जहां पारा करीब 42 डिग्री सेल्सियस के डरावने आंकड़े को छू रहा था। इस चिलचिलाती धूप और गर्म थपेड़ों ने न केवल इंसानों का दम निकाल रखा है, बल्कि आसमान में उड़ने वाले बेजुबान परिंदे भी इसकी सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। इसी हाहाकार के बीच ज्योतिसर से दया और जीव-दया की एक ऐसी मर्मस्पर्शी कहानी सामने आई है, जिसने इस क्रूर मौसम में भी लोगों के दिलों में तरावट घोल दी है।

सड़क किनारे तड़प रहा था मासूम, राहगीर बढ़ते रहे आगे पर पसीज गया संजू का दिल

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वाकया कुरुक्षेत्र-पिहोवा मार्ग का है, जहां सड़क किनारे खड़े एक ऊंचे पेड़ से गर्मी और प्यास की शिद्दत न सह पाने के कारण बगुले का एक छोटा सा बच्चा अचानक नीचे आ गिरा। घोंसले से महरुम हुआ यह नन्हा और मासूम परिंदा खौलती हुई सड़क के किनारे बदहवास होकर पंख फड़फड़ा रहा था। नेशनल हाईवे से गुजरते तमाम राहगीरों की नजरें उस पर पड़ीं, लेकिन रफ्तार के इस दौर में किसी के पास रुकने का वक्त नहीं था। तभी पास ही दुकान चलाने वाले संजू वर्मा की नजर इस असहाय जीव पर पड़ी। तड़पते हुए बच्चे को देखकर संजू से रहा नहीं गया और वह तुरंत अपनी दुकान छोड़ उस खौलती सड़क की तरफ दौड़ पड़े।

दुकान में लाकर कराया ‘फर्स्ट एड’, बिस्किट और पानी से लौटीं सांसें

संजू वर्मा ने बड़ी ही कोमलता से उस बदहवास परिंदे को अपने हाथों में उठाया और सीधे अपनी दुकान के ठंडे साए में ले आए। गर्मी के मारे बगुले के बच्चे का गला पूरी तरह सूख चुका था और उसकी सांसें उखड़ रही थीं। संजू ने बिना देर किए ड्रॉपर और कटोरी की मदद से उसे धीरे-धीरे पानी पिलाया। पानी की कुछ बूंदें हलक से नीचे उतरते ही परिंदे के शरीर में थोड़ी हरकत हुई। इसके बाद संजू ने उसे खाने के लिए बिस्किट के छोटे-छोटे टुकड़े दिए। करीब आधे-पौन घंटे के इस वात्सल्य और तीमारदारी का असर यह हुआ कि बेदम हो चुका वो नन्हा बगुला अब पूरी तरह सहज था और दुकान में आराम से बैठा नजर आया।

‘यही सच्ची मानवता है’— सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक संजू की तारीफ

इस पूरे वाकये के दौरान दुकान के आसपास राहगीर और स्थानीय दुकानदार जमा हो गए। संजू वर्मा की इस संवेदनशीलता को देखकर हर किसी की आंखें नम थीं और लोग उनकी पीठ थपथपा रहे थे। मौके पर मौजूद बुजुर्गों ने कहा कि इस भीषण दौर में जहां इंसान पानी के लिए अपनों से मुंह फेर लेता है, वहां एक बेजुबान के प्रति ऐसा अनुराग ही इंसान को इंसान बनाता है। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने आपस में यह तय किया है कि वे अब अपनी-अपनी छतों, दुकानों के बाहर और पार्कों में मिट्टी के सकोरों में पानी और दाने की नियमित व्यवस्था करेंगे, ताकि कोई और परिंदा प्यास के कारण असमय काल का ग्रास न बने। संजू वर्मा की यह छोटी सी कोशिश आज पूरे ज्योतिसर क्षेत्र में न सिर्फ चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी दे गई है।

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