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Janmashtami Shubh Yoga: इस बार जन्माष्टमी पर अद्भुत नक्षत्रीय संयोग, रात 12 बजे इस विधि से कराएं कान्हा का जन्म

Janmashtami Shubh Yoga: इस बार जन्माष्टमी पर अद्भुत नक्षत्रीय संयोग, रात 12 बजे इस विधि से कराएं कान्हा का जन्म

इस बार जन्माष्टमी पर अद्भुत नक्षत्रीय संयोग, रात 12 बजे इस विधि से कराएं कान्हा का जन्म

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AAmandeep Singh

Janmashtami Shubh Yoga: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्मोत्सव इस बार बेहद खास और फलदायी रहने वाला है। सनातन धर्म में जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री हरि विष्णु (श्रीकृष्ण) के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ का जन्मोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस साल 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर कई ऐसे दुर्लभ ज्योतिषीय योग बन रहे हैं, जो द्वापर युग में कान्हा के जन्म के समय मौजूद थे।

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द्वापर युग जैसा नक्षत्रीय संयोग, रोहिणी नक्षत्र और वृष के चंद्रमा में पधारेंगे कान्हा

धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मध्यरात्रि में, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में हुआ था।

ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों का कहना है कि इस वर्ष भी जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में चंद्रमा का अद्भुत योग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह शुभ संयोग तंत्र, मंत्र और साधना के साथ-साथ लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत सिद्धदायक माना जाता है। इस योग में की गई भक्ति और मनोकामनाएं शीघ्र फलदायी होती हैं।

संध्या समय से शुरू करें पूजा की तैयारी, महामंत्रों का करें जाप

पंडित कल्कि राम के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद पूजा स्थान की अच्छे से साफ-सफाई करें। एक पवित्र चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर बाल गोपाल यानी लड्डू गोपाल की प्रतिमा अथवा भगवान श्रीकृष्ण का चित्र स्थापित करें। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बने पंचामृत से भगवान का विधि-विधान से अभिषेक करें।

पूजा के दौरान वातावरण को भक्तिमय बनाने और मानसिक शांति के लिए भक्त महामंत्र ‘हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे’ अथवा ‘क्लीं कृष्णाय नमः’ का श्रद्धापूर्वक जाप कर सकते हैं।

मध्यरात्रि 12 बजे ऐसे कराएं जन्म, खीरे और माखन-मिश्री का लगाएं भोग

चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे हुआ था, इसलिए मुख्य जन्मोत्सव पूजा मध्यरात्रि को ही की जाती है।

जन्म विधान: रात 12 बजे लड्डू गोपाल को डंठल वाले खीरे (जिसे गर्भ का प्रतीक माना जाता है) से काटकर symbolic जन्म कराया जाता है।

आरती व भोग: इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और कान्हा के प्रिय माखन-मिश्री, पंजीरी, बांसुरी और तुलसी दल अर्पित करें।

ऐसी मान्यता है कि इस पावन रात्रि में निश्चल भाव से की गई सेवा-पूजा से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है तथा संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं।

“जन्माष्टमी का यह नक्षत्रीय संयोग साधकों और भक्तों के लिए विशेष फलदायी है। श्रद्धा और नियम के साथ किया गया पूजन जीवन के दुखों का हरण करता है।”

— पंडित कल्कि राम, ज्योतिषाचार्य

Disclaimer: इस समाचार में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। ‘जगमार्ग’ इनमें से किसी भी दावे या जानकारी की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इसे केवल जनरुचि और आस्था के तौर पर ही लें।

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