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Kurukshetra Tirthas Development: कुरुक्षेत्र की धार्मिक विरासत को मिलेगी नई पहचान: 48 कोस के 182 तीर्थों का अब एक ही 'डिजाइन' पर होगा कायाकल्प

GGaganpreet Kaur
कुरुक्षेत्र की धार्मिक विरासत को मिलेगी नई पहचान: 48 कोस के 182 तीर्थों का अब एक ही 'डिजाइन' पर होगा कायाकल्प
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कुरुक्षेत्र (जग मार्ग)। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की परिधि में आने वाले 48 कोस के 182 तीर्थों की महिमा भले ही अपनी-अपनी जगह अनूठी हो, लेकिन अब इनका बाहरी स्वरूप और स्थापत्य एक समान नजर आएगा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (KDB) ने इन पौराणिक स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। इस नई योजना के तहत, सभी तीर्थों का विकास अब एक ही खास ‘पैटर्न’ और ‘मैप’ के आधार पर किया जाएगा। केडीबी का यह कदम न केवल तीर्थों की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी एक व्यवस्थित अनुभव सुनिश्चित करेगा।

सर्वे के बाद पुराने कार्यों पर लगा ब्रेक

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इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले बोर्ड ने सभी तीर्थों का गहन सर्वे कराया था। सर्वे की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए, जिसमें पाया गया कि कई जगहों पर बिना किसी ठोस योजना के अनावश्यक निर्माण किए गए थे। कहीं महिमा पट्ट (जानकारी बोर्ड) ऐसी जगह लगा दिए गए जहां श्रद्धालुओं की नजर ही नहीं पड़ती, तो कहीं डिजाइन इतना उलझा हुआ था कि मूल धार्मिक महत्ता दब गई थी। इसी को देखते हुए केडीबी ने मनमर्जी से चल रहे निर्माण कार्यों पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है और 55 मुख्य तीर्थों पर नए डिजाइन के अनुसार पत्थर लगाने (स्टोन पिचिंग) और घाटों के निर्माण का काम शुरू कर दिया है।

द्वार से लेकर परिक्रमा पथ तक, सब दिखेगा एक जैसा

तैयार किए गए विकास मैप की सबसे बड़ी खासियत इसकी एकरूपता है। अब हर तीर्थ का मुख्य प्रवेश द्वार, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, हाई मास्क लाइटें और कुंड की परिक्रमा एक ही शैली की होगी। विशेष रूप से ‘महिमा पट्ट’ का एक स्टैंडर्ड डिजाइन तैयार किया गया है, जिसे तीर्थ के मुख्य बाहरी हिस्से पर लगाया जाएगा ताकि बाहर से गुजरने वाले लोग भी उस स्थान के इतिहास को आसानी से पढ़ सकें। इसके अलावा कथा स्थल, आरती घाट और रंगाई-पुताई के लिए भी एक ही ‘कलर कोड’ और स्थापत्य कला का पालन किया जाएगा।

पारदर्शिता और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य तीर्थों के गौरव को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। सिंघल के अनुसार, “तीर्थ समितियों के सहयोग से होने वाले इन कार्यों में अब अधिक पारदर्शिता आएगी क्योंकि डिजाइन और बजट का खाका पहले से स्पष्ट होगा।” जब ये कार्य पूरे होंगे, तो दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को 48 कोस की यात्रा के दौरान हर पड़ाव पर एक भव्य और सुव्यवस्थित सांस्कृतिक ढांचा देखने को मिलेगा, जो कुरुक्षेत्र की एक विशेष पहचान बनेगा।

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