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Bhadrakali Temple Kurukshetra: 52 शक्तिपीठों में से एक भद्रकाली मंदिर की महिमा, जानें क्यों यहाँ मिट्टी के घोड़े चढ़ाना है शुभ

AAmandeep Singh
52 शक्तिपीठों में से एक भद्रकाली मंदिर की महिमा, जानें क्यों यहाँ मिट्टी के घोड़े चढ़ाना है शुभ
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कुरुक्षेत्र | धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की फिजाओं में आज सुबह से ही शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की गूंज है। अवसर है चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ का, और केंद्र बना है ऐतिहासिक श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर। 52 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर की महिमा केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस इतिहास का गवाह है जहाँ स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को विजय का आशीर्वाद दिलाया था। ब्रह्मसरोवर के समीप स्थित इस मंदिर में आज तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए आतुर थे।

सती का टखना और महाभारत का विजय संकल्प

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के हिस्से किए थे, तब यहाँ उनका दाहिना टखना (Gulph) गिरा था। इसी कारण इस स्थान को ‘कूप’ और शक्तिपीठ की संज्ञा दी गई। लेकिन इस मंदिर की ख्याति महाभारत युद्ध से गहराई से जुड़ी है। मान्यता है कि कुरुक्षेत्र के मैदान में उतरने से पहले श्री कृष्ण ने पांडवों के साथ यहाँ विशेष पूजा अर्चना की थी। अर्जुन ने प्रतिज्ञा की थी कि यदि वे धर्मयुद्ध में विजयी होते हैं, तो वे यहाँ उत्तम नस्ल के घोड़ों की जोड़ी अर्पित करेंगे।

क्यों चढ़ाए जाते हैं मिट्टी के घोड़े?

इतिहास कहता है कि कौरवों पर विजय पाने के बाद पांडवों ने अपना संकल्प पूरा किया और मंदिर में असली घोड़े भेंट किए। समय बदला, लेकिन परंपरा आज भी जीवित है। अब श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर या संतान प्राप्ति की कामना के साथ यहाँ मिट्टी, पत्थर या चूने से बने छोटे-बड़े घोड़े चढ़ाते हैं। मंदिर के एक कोने में रखे हजारों घोड़े भक्तों की अटूट आस्था की गवाही देते हैं।

भव्य सजावट और ‘स्मार्ट’ निगरानी

इस बार चैत्र नवरात्रि पर मंदिर प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। पूरे परिसर को विदेशी फूलों और झिलमिलाती लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। उमड़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मंदिर के हर कोने पर सीसीटीवी कैमरों से पैनी नजर रखी जा रही है और महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी तरह की भगदड़ न मचे।

श्रद्धालुओं का उत्साह: दूर-दूर से पहुँच रहे भक्त

मंदिर में केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि पंजाब, दिल्ली और राजस्थान से भी श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। दर्शन कर बाहर निकले एक श्रद्धालु ने बताया, “यहाँ आकर जो शांति मिलती है, वह अद्भुत है। हमने भी आज अपनी मन्नत पूरी होने पर माता के चरणों में घोड़ों की जोड़ी अर्पित की है।” प्रशासन ने गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और छाया की भी विशेष व्यवस्था की है।

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