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Kurukshetra News: भाखड़ा नहर में डूबे मजदूर लक्ष्मण का शव 3 दिन बाद बरामद

GGaganpreet Kaur
भाखड़ा नहर में डूबे मजदूर लक्ष्मण का शव 3 दिन बाद बरामद
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ज्योतिसर ( पवन शर्मा ) हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में किरमिच गांव के पास भाखड़ा नहर (नरवाना ब्रांच) में डूबे मजदूर लक्ष्मण दास का शव तीन दिनों की भारी मशक्कत के बाद आखिरकार शनिवार को बरामद कर लिया गया है। पिछले 72 घंटों से पीड़ित परिजन और गांव के लोग अनहोनी की आशंका के बीच नहर के किनारों पर खाक छान रहे थे। परिजनों को मन में कहीं न कहीं यह उम्मीद थी कि लक्ष्मण शायद जिंदा मिल जाए, लेकिन शनिवार सुबह जैसे ही बटेड़ा हेड के पास पानी में एक शव उतराता हुआ दिखा, परिवार की रही-सही उम्मीद भी पूरी तरह टूट गई।

बिहार से आकर भट्ठे पर करता था मजदूरी

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मूल रूप से बिहार का रहने वाला 40 वर्षीय लक्ष्मण दास कुरुक्षेत्र के किरमिच गांव के पास ही रह रहा था। वह यहां के एक स्थानीय ईंट भट्ठे पर मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। बुधवार को वह रोजाना की तरह काम पर था और इसी दौरान नहर के किनारे हाथ धोने के लिए गया था। तभी अचानक पैर फिसलने के कारण वह अनियंत्रित होकर सीधे नहर के गहरे पानी में जा गिरा। वहां मौजूद कुछ लोगों ने शोर सुनकर उसे बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि लक्ष्मण देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गया।

बटेड़ा हेड पर दिन-रात पहरा दे रहे थे रिश्तेदार

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की टीम ने पहले दिन कई घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया था, मगर नहर का जलस्तर और बहाव तेज होने के कारण सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद सरकारी प्रयासों को धीमा पड़ता देख लक्ष्मण के परिजन और परिचितों ने खुद कमान संभाली। वे नहर के बहाव की दिशा में पड़ने वाले संभावित ठिकानों पर नजर रखने लगे। रिश्तेदारों ने बटेड़ा हेड को मुख्य पॉइंट बनाया और वहां दिन-रात का पहरा बिठा दिया ताकि शव आगे न बह जाए।

मशहूर गोताखोर प्रगट सिंह की टीम ने निकाला शव

शनिवार सुबह तड़के हेड पर निगरानी कर रहे परिजनों को पानी के बीच एक शव फंसा हुआ दिखाई दिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए तुरंत स्थानीय पुलिस और इलाके के मशहूर गोताखोर प्रगट सिंह को इस बात की इत्तला दी। सूचना मिलते ही गोताखोरों की टीम साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंची। गोताखोर प्रगट सिंह और उनके साथियों ने काफी मशक्कत के बाद शव को नहर की लहरों से बाहर खींच निकाला, जिसकी शिनाख्त बाद में लक्ष्मण दास के रूप में की गई।

इकलौते कमाने वाले की मौत से बेसहारा हुआ परिवार

लक्ष्मण दास अपने पीछे रोता-बिलखता परिवार छोड़ गया है, जिसमें उसके छह बच्चे शामिल हैं। वह पूरे घर में अकेला कमाने वाला शख्स था और बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आता था। परिजनों ने रोते हुए बताया कि कुछ समय पहले ही उसने पाई-पाई जोड़कर अपनी बड़ी बेटी की शादी संपन्न की थी। हादसे वाले दिन भी वह सुबह अपने बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाकर दवाई दिलाकर लाया था और उसके तुरंत बाद काम पर लौट गया था। फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है और परिजनों के बयान दर्ज कर पोस्टमॉर्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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