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Census 2026 Kurukshetra: डोर-बेल का लंबा इंतजार और बंद ताले; कुरुक्षेत्र में थमी जनगणना की रफ्तार, कर्मचारी परेशान

GGaganpreet Kaur
डोर-बेल का लंबा इंतजार और बंद ताले; कुरुक्षेत्र में थमी जनगणना की रफ्तार, कर्मचारी परेशान
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में इन दिनों चल रही जनगणना की प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों के लिए किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम साबित नहीं हो रही है। धरातल पर हालात ये हैं कि जनगणना किट और रजिस्टर थामे प्रगणकों (Enumerators) को एक-एक जानकारी जुटाने के लिए पसीने छूट रहे हैं। कहीं सूने घरों पर लटके ताले चुनौती दे रहे हैं, तो कहीं एक ही छत के नीचे सिमटे अनगिनत परिवार जनगणना के गणित को उलझा रहे हैं। स्थिति यह है कि काम पूरा करने के दबाव में कर्मचारियों को रात आठ-नौ बजे तक गलियों की खाक छाननी पड़ रही है।

एक घर, दस परिवार: उलझ रहा है आंकड़ों का जाल

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शहर के सघन और व्यावसायिक क्षेत्रों में जनगणना करना सबसे पेचीदा काम बन गया है। जनगणना ड्यूटी में लगी शिक्षिका गीता और शिक्षक रितेश ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया, “नियम के मुताबिक हम एक भवन को एक इकाई मानते हैं, लेकिन जब भीतर कदम रखते हैं तो तस्वीर अलग होती है। एक ही घर के छोटे-छोटे कमरों में आठ से दस परिवार रह रहे हैं। ऐसे में हर परिवार का अलग डेटा दर्ज करना किसी चुनौती से कम नहीं है।” इतना ही नहीं, कई लोग अपनी पूरी जानकारी साझा करने में कतराते हैं, जिससे प्रगणकों को एक ही घर के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। भीषण गर्मी के कारण लोग दोपहर में दरवाजा नहीं खोलते, जिसकी भरपाई करने के लिए कर्मचारियों को देर रात तक ड्यूटी देनी पड़ रही है।

खाली घर और डोर-बेल का लंबा इंतजार

शहर के पॉश इलाकों में ‘सूने घर’ बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। कर्मचारी बताते हैं कि डोर-बेल बजाने के बाद आधा-आधा घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। कई घरों के लोग कामकाज के सिलसिले में बाहर रहते हैं, जिससे हाउस मैपिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पहले तीन दिनों में हाउस मैपिंग का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन रविवार की छुट्टी और इन व्यवहारिक दिक्कतों के चलते अधिकतर क्षेत्रों में यह काम अभी भी अधर में लटका है। सुपरवाइजरों को रिपोर्ट सौंपने के लिए कर्मचारियों को आधी रात तक माथापच्ची करनी पड़ रही है।

ड्यूटी कटवाने की ‘जुगत’ और सख्ती की चेतावनी

जनगणना कार्य में आ रही इन दुश्वारियों के चलते कर्मचारियों में भारी निराशा देखी जा रही है। कई कर्मचारी बीमारी या अन्य पारिवारिक कारणों का हवाला देकर अपनी ड्यूटी हटवाने के लिए प्रशासनिक गलियारों के चक्कर काट रहे हैं। कुछ रसूखदार कर्मी अपनी ड्यूटी कटवाने में सफल भी रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर चुका है। उच्चाधिकारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जनगणना के राष्ट्रीय कार्य में कोताही बरतने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

ग्रामीण अंचलों में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। वहां भी प्रगणकों को किसानों और मजदूरों के काम पर जाने के कारण सुबह जल्दी या देर शाम को ही उनसे मुलाकात हो पा रही है। कुल मिलाकर, कुरुक्षेत्र में जनगणना की यह मुहिम फिलहाल सुस्त रफ्तार और तकनीकी अड़चनों के बीच फंसी नजर आ रही है।

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