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Kurukshetra Farmers Protest: 'अमेरिका से गेहूं-मक्का आया तो बर्बाद होगा देसी किसान', कुरुक्षेत्र की सड़कों पर भाकियू चढ़ूनी का हल्लाबोल

GGaganpreet Kaur
'अमेरिका से गेहूं-मक्का आया तो बर्बाद होगा देसी किसान', कुरुक्षेत्र की सड़कों पर भाकियू चढ़ूनी का हल्लाबोल
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कुरुक्षेत्र।  केंद्र सरकार और अमेरिका के बीच प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर हरियाणा के किसानों में गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले सैकड़ों किसान कुरुक्षेत्र की सड़कों पर उतर आए। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अगुवाई में आक्रोशित किसानों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल (डेपुटेशन) का पुतला फूंका और केंद्र की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शारीरिक अस्वस्थता भी किसानों के इस विरोध की तपिश को कम नहीं कर सकी। भाकियू प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी खुद बैशाखी के सहारे कुरुक्षेत्र के पंचायत भवन पहुंचे, जहां पहले से ही भारी संख्या में किसान जमा थे। किसानों ने वहां से अमेरिकी डेपुटेशन के पुतले की अर्थी उठाई और पैदल मार्च करते हुए उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंचे। सचिवालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने “डेपुटेशन वापस जाओ” और “किसान विरोधी ट्रेड डील नहीं चलेगी” के गगनभेदी नारे लगाए। चढ़ूनी ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी कि संगठन किसी भी कीमत पर देश की खेती को कॉरपोरेट और विदेशी ताकतों के हाथों गिरवी नहीं रखने देगा। यदि सरकार ने कदम पीछे नहीं खींचे, तो इस लड़ाई को राष्ट्रव्यापी रूप दिया जाएगा।

‘अमेरिकी सब्सिडी के आगे टिक नहीं पाएगा भारतीय किसान’

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पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इस प्रस्तावित ट्रेड डील के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “अमेरिका में कॉर्पोरेट स्तर पर विशालकाय जोतों में खेती होती है, जहां वहां की सरकार अपने किसानों को अरबों डॉलर की भारी-भरकम सब्सिडी देती है। इसके चलते वहां उत्पादन लागत बेहद कम है। यदि अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन और दालें बिना किसी कड़े आयात शुल्क के भारतीय बाजारों में डंप की जाने लगीं, तो हमारे देश के छोटे और मझोले किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। हमारी फसलों के दाम औंधे मुंह गिरेंगे।”

देश की अर्थव्यवस्था को भी लगेगा झटका

भाकियू अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दिया जा रहा है, और दूसरी तरफ कृषि प्रधान देश में विदेशी सामान मंगाने के रास्ते खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद खरीदने से न केवल देश का बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार बाहर जाएगा, बल्कि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी टूट जाएगी। सरकार को विदेशी हितों के बजाय देश के अन्नदाता और कृषि क्षेत्र के वजूद को प्राथमिकता देनी चाहिए।

हरिद्वार के वीआईपी घाट पर सजेगा ‘राष्ट्रीय चिंतन शिविर’

कुरुक्षेत्र की यह हलचल अब सीधे उत्तराखंड की ओर रुख करने वाली है। चढ़ूनी ने बताया कि इस ट्रेड डील के विरोध और अन्य जलते हुए कृषि मुद्दों पर रणनीति बनाने के लिए आगामी 6, 7 और 8 जून को हरिद्वार के वीआईपी घाट पर तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय चिंतन शिविर’ बुलाया गया है। इस महामंथन में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों के प्रमुख किसान नेता और थिंक-टैंक हिस्सा लेंगे। शिविर में न केवल इस प्रस्तावित डील की बारीकियों पर चर्चा होगी, बल्कि केंद्र सरकार तक किसानों की बात पुरजोर तरीके से पहुंचाने के लिए एक बड़े और रणनीतिक आंदोलन का खाका भी तैयार किया जाएगा।

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