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Gaurav Murder Case Kurukshetra: जन्मदिन मनाने गए 17 साल के किशोर की ट्रेन से धक्का देकर हत्या, 13 दिन बाद भी कातिल फरार

AAmandeep Singh
जन्मदिन मनाने गए 17 साल के किशोर की ट्रेन से धक्का देकर हत्या, 13 दिन बाद भी कातिल फरार
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कुरुक्षेत्र। कहानी शुरू होती है 24 मार्च से, जब गौरव का जन्मदिन था। उसके दोस्त उसे यह कहकर अपने साथ ले गए कि हरिद्वार में जन्मदिन का जश्न मनाएंगे। परिवार ने भी उन पर भरोसा किया। हरिद्वार की सैर के बाद 30 मार्च को जब वे अंबाला से वापस लौट रहे थे, तब गौरव ने आखिरी बार अपनी मां से बात की थी। दोपहर करीब 3 बजे उसने फोन कर मामा को कुरुक्षेत्र स्टेशन पर बाइक लेकर आने को कहा। लेकिन जब मामा स्टेशन पहुंचा, तो गौरव नहीं बल्कि उसकी मौत की खबर उसका इंतजार कर रही थी।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: पहले हादसा माना, फिर दर्ज की FIR

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इस मामले में राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस इसे महज एक रेल हादसा मानकर फाइल बंद करना चाहती थी। गौरव के पिता मोहन बहादुर ने जब खुद भागदौड़ की और ठोस सबूत पेश किए, तब कहीं जाकर जीआरपी ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। मोहन बहादुर का कहना है, “जब भी हम अधिकारियों को फोन करते हैं, या तो वे उठाते नहीं और अगर उठा भी लिया तो बस ‘जल्द पकड़ लेंगे’ कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।”

धक्का देने से पहले हुई थी मारपीट?

परिजनों का दावा है कि आरोपियों ने गौरव को ट्रेन से नीचे फेंकने से पहले उसके साथ जमकर मारपीट की थी। घटना के बाद से ही गौरव के तथाकथित ‘दोस्त’ गायब हैं। सवाल यह उठता है कि अगर यह हादसा था, तो उसके दोस्त मौके से क्यों भागे? क्यों उन्होंने गौरव को बचाने या पुलिस को सूचित करने की कोशिश नहीं की?

आर-पार की लड़ाई के मूड में ग्रामीण

बेटे को खोने के गम और व्यवस्था की बेरुखी से आहत पिता ने अब हार न मानने का फैसला किया है। मोहन बहादुर ने बताया कि अब वे गांव की पंचायत को साथ लेकर जीआरपी के आला अधिकारियों से मिलेंगे। अगर अब भी गिरफ्तारी नहीं हुई, तो ग्रामीण कड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।

वहीं, कुरुक्षेत्र जीआरपी थाना प्रभारी राजेश कुमार का कहना है कि पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और आरोपियों के ठिकानों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इस गुत्थी को सुलझा लिया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि वह ‘जल्द’ कब आएगा? क्या 13 दिन का समय एक किशोर के हत्यारों को ढूंढने के लिए काफी नहीं था?

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