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Kurukshetra Sunflower Procurement: हरियाणा किसान न्यूज़: 7721 रुपये MSP के बावजूद नहीं बिक रही सूरजमुखी, इस्माईलाबाद में हैफेड की खरीद का इंतजार

GGaganpreet Kaur
हरियाणा किसान न्यूज़: 7721 रुपये MSP के बावजूद नहीं बिक रही सूरजमुखी, इस्माईलाबाद में हैफेड की खरीद का इंतजार
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के इस्माईलाबाद क्षेत्र में गेहूं सीजन की हलचल थमते ही अब सूरजमुखी की फसल मंडियों में पहुंचने लगी है। खेतों में सूरजमुखी की सुनहरी फसल पूरी तरह पककर तैयार है, लेकिन अनाज मंडी का मंजर किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। फसल की आवक तो शुरू हो चुकी है, पर सरकारी खरीद का खाता अब तक नहीं खुल पाया है। इसके चलते अपनी गाढ़े पसीने की कमाई लेकर मंडी पहुंच रहे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में कोई खरीदार न मिलने की वजह से व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

फसल वापस घर ले जाने को मजबूर अन्नदाता, एमएसपी पर टिकी निगाहें

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मंडी में अपनी ट्रॉली खड़ी कर खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे किसान राम कुमार, प्रदीप, राजेश और विष्णु ने अपनी आपबीती साझा की। किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर फसल की कटाई कर ली ताकि अगली बुआई की तैयारी की जा सके। लेकिन यहां सरकारी स्तर पर खरीद का कोई नामोनिशान नहीं है। मंडी में फसल को असुरक्षित छोड़ने के बजाय कई किसान अपनी उपज को वापस ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर घर ले जाने को मजबूर हैं, जिससे उनका परिवहन खर्च बेवजह दोगुना हो रहा है। किसानों ने दोटूक कहा कि सरकार को बिना वक्त गंवाए तुरंत खरीद खिड़की खोलनी चाहिए।

7721 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है भाव, आदेश का इंतजार

इस पूरे गतिरोध पर जब मार्केट कमेटी के सचिव अंकुर ठकराल से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इस बार सरकार ने सूरजमुखी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) $7721$ रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इस्माईलाबाद अनाज मंडी को ही आधिकारिक खरीद केंद्र बनाया गया है और इस बार खरीद की कमान सरकारी एजेंसी ‘हैफेड’ (HAFED) को सौंपी गई है। सचिव ने उम्मीद जताई है कि आगामी एक जून से सूरजमुखी की सुचारू खरीद प्रक्रिया धरातल पर शुरू हो जाएगी।

उच्चाधिकारियों के हरी झंडी की प्रतीक्षा

मार्केट कमेटी के अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बारदाने और सेंटर की मैपिंग का काम लगभग अंतिम चरण में है। जैसे ही चंडीगढ़ मुख्यालय से खरीद शुरू करने के लिखित आदेश और गाइडलाइंस जारी होंगी, वैसे ही तौल का काम शुरू कर दिया जाएगा। तब तक किसानों से भी संयम बरतने और फसल को सुखाकर मंडी में लाने की अपील की गई है ताकि नमी (मॉइस्चर) के नाम पर बाद में कोई कटौती न हो। अब देखना होगा कि प्रशासन एक जून के अपने वादे पर कितना खरा उतरता है या किसानों का इंतजार और लंबा होता है।

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