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GGaganpreet Kaur
कुरुक्षेत्र में मजदूरों का बड़ा प्रदर्शन: 30 हजार न्यूनतम वेतन और 8 घंटे काम की मांग पर अड़े श्रमिक।
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कुरुक्षेत्र। पसीने की स्याही से विकास की इबारत लिखने वाले हाथों ने आज अपनी हक की लड़ाई के लिए मुट्ठियां तान दीं। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में मजदूर संगठनों ने अपनी ताकत का अहसास कराया। निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन, मनरेगा मजदूर यूनियन और जन संघर्ष मंच हरियाणा (मासा) के बैनर तले सैकड़ों मजदूर आज सड़कों पर उतरे। लेबर चौकों से शुरू हुआ यह आक्रोश प्रदर्शन अंबेडकर चौक पर जाकर एक बड़े संकल्प में तब्दील हो गया।

मजदूर दिवस: उत्सव नहीं, संघर्ष का प्रतीक

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कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय लेबर चौकों पर आयोजित जनसभाओं से हुई। ‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारों के बीच मजदूरों ने अंबेडकर चौक तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का सबसे तीखा हमला सरकार की नीतियों और श्रमिक कानूनों में बदलाव को लेकर था। छोटू राम पार्क के पास हुई सभा का संचालन करते हुए निर्माणकार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के महासचिव सुरेश कुमार ने कहा कि आज का दिन महज एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि उन शहीदों की याद है जिन्होंने 8 घंटे काम की मर्यादा तय करने के लिए अपनी जान दी थी।

प्रमुख मांगें: वेतन और मानवाधिकारों पर जोर

प्रदर्शनकारी मजदूरों ने सरकार के सामने मांगों का एक लंबा पुलिंदा रखा। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:

न्यूनतम वेतन: बढ़ती महंगाई के दौर में न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया जाए।

दमनकारी कार्रवाई पर रोक: नोएडा, मानेसर, गुरुग्राम और फरीदाबाद में मजदूर नेताओं पर दर्ज ‘झूठे’ मुकदमे वापस लिए जाएं और जेलों में बंद साथियों की तत्काल रिहाई हो।

कार्य समय की सीमा: 12 घंटे काम के प्रस्तावित चलन को बंद कर 8 घंटे के कार्य दिवस को सख्ती से लागू किया जाए।

पुलिस हस्तक्षेप: मजदूर आंदोलनों और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों में पुलिस का दखल पूरी तरह बंद हो।

140 साल बाद भी वही चुनौतियां: करनैल सिंह

यूनियन के प्रांतीय प्रधान करनैल सिंह ने शिकागो के ‘हे मार्केट’ के ऐतिहासिक बलिदान का जिक्र करते हुए वर्तमान परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यह विडंबना ही है कि करीब 140 साल पहले शिकागो में मजदूरों ने जिन अधिकारों के लिए फांसी के फंदे को चूमा था, आज का मजदूर वर्ग उन्हीं मूलभूत जरूरतों के लिए फिर से सड़क पर खड़ा है। उस समय 8 घंटे काम की मांग थी, और आज व्यवस्था फिर से मजदूरों को 12 घंटे की गुलामी की ओर धकेल रही है।”

अंबेडकर चौक पर लिया संकल्प

शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ यह मार्च अंबेडकर चौक पर संपन्न हुआ। यहाँ बाबा साहेब की प्रतिमा के समक्ष मजदूरों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई का संकल्प लिया। संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और धार दी जाएगी। दोपहर की तपती धूप में भी मजदूरों का जोश कम नहीं हुआ। इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया कि विकास के पहिये को घुमाने वाला यह तबका अब अपने श्रम के उचित मोल और सम्मानजनक जीवन के लिए पीछे हटने को तैयार नहीं है।

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