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LNJP hospital Kurukshetra: जेल पहुंचा आरोपी डॉ. शैलेंद्र, महिला आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से मांगी पूरी 'कुंडली'

GGaganpreet Kaur
जेल पहुंचा आरोपी डॉ. शैलेंद्र, महिला आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से मांगी पूरी 'कुंडली'
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के मुख्य सरकारी अस्पताल एलएनजेपी में बीते 29 मई को इलाज के बहाने आई एक 15 साल की मासूम बच्ची के साथ डॉक्टर शैलेंद्र ने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस घटना के बाद से ही स्वास्थ्य महकमे की सुरक्षा व्यवस्था और डॉक्टरों के चरित्र पर गंभीर सवाल उठ रहे थे। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को दबोचा था। पुलिस कस्टडी में हुई गहन पूछताछ और मौका-ए-वारदात की तस्दीक के बाद बुधवार को रिमांड खत्म होने पर आरोपी को कुरुक्षेत्र अदालत के समक्ष लाया गया। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और समाज पर इसके असर को देखते हुए आरोपी डॉक्टर को तुरंत जेल (न्यायिक हिरासत) भेजने के आदेश जारी कर दिए।

महिला आयोग सख्त; पूछा- दागी को दोबारा नौकरी कैसे मिली?

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उधर, चंडीगढ़ में इस मामले की गूंज सुनाई देने के बाद हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। आयोग ने महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं (DGHS) हरियाणा को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट पत्र जारी किया है। आयोग का सीधा सवाल है कि जब डॉ. शैलेंद्र पूर्व में भी विवादों और आरोपों से घिरे रहे थे, तो उनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद उन्हें दोबारा कंसल्टेंट चिकित्सक के तौर पर अस्पताल में एंट्री कैसे मिली? आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर इस पूरी पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं।

क्रेडेंशियल और स्क्रीनिंग पर उठे सवाल, 72 घंटे में मांगा जवाब

महिला आयोग ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को घेरते हुए उनसे वह मूल फाइल और आदेशों की प्रतियां मांगी हैं, जिसके तहत इस ज्वाइनिंग को हरी झंडी दिखाई गई थी। आयोग ने पूछा है कि क्या डॉक्टर शैलेंद्र को दोबारा रखते समय किसी पात्रता मानदंड, स्क्रीनिंग या पुलिस वेरिफिकेशन जैसी तय चयन प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं? आयोग की चेयरपर्सन ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि अगले 3 दिनों के भीतर तमाम दस्तावेजों के साथ जवाब मुख्यालय पहुंच जाना चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि इस लापरवाही के पीछे विभाग के किन बड़े अधिकारियों का हाथ था।

एससी/एसटी एक्ट जुड़ने से और कड़ा हुआ कानूनी फंदा

केयूके थाना पुलिस के जांच अधिकारियों के मुताबिक, मामले की तह तक जाने के लिए साइंटिफिक और फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा चुके हैं। जांच के दौरान कुछ नए तथ्य सामने आने और पीड़िता के वर्ग को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने मामले में धाराएं बढ़ाते हुए एससी/एसटी एक्ट (Atherocities Act) भी जोड़ दिया है। इसके बाद अब आरोपी की जमानत की राह लगभग नामुमकिन हो गई है। सामाजिक संगठनों और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों जैसी सुरक्षित जगहों पर ऐसे भेड़ियों की एंट्री रोकने के लिए परमानेंट सिस्टम बनाना बेहद जरूरी है।

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