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Samadhan Shivir Kurukshetra: कुरुक्षेत्र में 'समाधान' के लिए भटक रहे लोग: शिविरों में भी नहीं मिल रही राहत, दफ्तरों के चक्कर काट थक रहे बुजुर्ग

GGaganpreet Kaur
कुरुक्षेत्र में 'समाधान' के लिए भटक रहे लोग: शिविरों में भी नहीं मिल रही राहत, दफ्तरों के चक्कर काट थक रहे बुजुर्ग
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कुरुक्षेत्र। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने लोगों की समस्याओं के ऑन-द-स्पॉट निपटारे के लिए ‘समाधान शिविरों’ का आयोजन तो शुरू कर दिया है, लेकिन धरातल पर तस्वीर अब भी उम्मीदों से उलट है। सप्ताह में दो दिन लगने वाले इन विशेष शिविरों में पहले दिन जैसी ही भीड़ अब भी जुट रही है, जो यह बताने के लिए काफी है कि शिकायतों का निस्तारण उस रफ्तार से नहीं हो रहा, जैसा दावा किया गया था। वीरवार को जिला सचिवालय में लगे शिविर में पहुंचे दर्जनों लोगों के चेहरों पर समाधान की चमक के बजाय व्यवस्था की सुस्ती से उपजी मायूसी साफ देखी गई।

राशन कार्ड और पेंशन का दर्द: शिकायतों का लगा पहाड़

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शिविर में पहुंचे करीब 100 से अधिक फरियादियों में सबसे बड़ी तादाद उन बुजुर्गों और गरीबों की थी, जिनकी पेंशन या राशन कार्ड तकनीकी खामियों के चलते काट दिए गए हैं। आलम यह रहा कि 100 शिकायतों में से केवल 40 का ही मौके पर निस्तारण हो सका। बाकी पीड़ितों को संबंधित विभागों के चक्कर काटने के लिए पुराने ढर्रे पर ही छोड़ दिया गया। कई लोग ऐसे भी थे जो तीन-चार बार शिविर में हाजिरी लगा चुके हैं, लेकिन उनकी फाइल फाइलों के ढेर में ही कहीं दबी रह गई है।

पंचकूला की राह दिखाकर झाड़ा पल्ला, दस्तावेजों के जाल में उलझे पीड़ित

शिविर में सबसे ज्यादा नाराजगी उन कर्मियों को लेकर दिखी, जो स्थानीय स्तर पर समाधान करने के बजाय पीड़ितों को सीधे पंचकूला मुख्यालय जाने की सलाह दे रहे हैं। 15 से ज्यादा लोग ऐसे थे जिन्हें बिना किसी ठोस आश्वासन के बैरंग लौटना पड़ा। वहीं, कई बुजुर्गों ने शिकायत की कि उन्हें समाधान देने से पहले ऐसे-ऐसे दस्तावेज जुटाने को कहा जा रहा है, जिन्हें तैयार करवाना उनके लिए पहाड़ चढ़ने जैसा है। इससे न केवल उनकी परेशानी बढ़ी है, बल्कि सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

एडीसी की सख्ती: लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चेतावनी

शिविर की कमान संभाल रहे एडीसी विवेक आर्य ने मौके पर मौजूद विभागाध्यक्षों को दो टूक लहजे में हिदायत दी। उन्होंने कहा कि समाधान शिविर महज औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार के संकल्प को जमीन पर उतारने का माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि हर शिकायत का निपटारा एक निश्चित समय-सीमा के भीतर होना चाहिए और गुणवत्तापूर्ण एटीआर (Action Taken Report) पोर्टल पर अपलोड की जाए। एडीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि जो शिकायतें नियम विरुद्ध हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से रिजेक्ट श्रेणी में डालें ताकि पीड़ित भ्रम में न रहे। अब देखना यह होगा कि साहब के इन आदेशों का असर अगली पंचायत तक फाइलों से निकलकर जनता की जिंदगी में कितना उतर पाता है।

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