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Kurukshetra Highway Jam: कुरुक्षेत्र में बीच सड़क टाट बिछाकर बैठे विधायक रामकरण काला, स्टेट हाईवे-6 किया जाम

AAmandeep Singh
Kurukshetra Highway Jam: कुरुक्षेत्र में बीच सड़क टाट बिछाकर बैठे विधायक रामकरण काला, स्टेट हाईवे-6 किया जाम
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में पिछले कई महीनों से सुलग रही जन-समस्याओं की चिंगारी रविवार को अचानक आंदोलन के शोलों में बदल गई। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गठित ‘सर्वसमाज संघर्ष कमेटी’ ने रविवार दोपहर शाहाबाद-बराड़ा राजकीय राजमार्ग (स्टेट हाईवे-6) पर करीब दो घंटे का जोरदार सांकेतिक जाम लगा दिया। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इलाके के विधायक रामकरण काला खुद प्रदर्शनकारियों के साथ सड़क के बीचों-बीच टाट बिछाकर बैठ गए। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और देखते ही देखते हाईवे पर दोनों तरफ गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लग गईं।

महापंचायत में नहीं पहुंचे अफसर तो अचानक लिया चक्का जाम का फैसला

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दरअसल, यह पूरा विवाद रविवार सुबह शहीद उधम सिंह मेमोरियल में बुलाई गई महापंचायत से शुरू हुआ। संघर्ष कमेटी का दावा है कि इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की शिकायतें सुनने के लिए आना था। जब तय समय के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो जनता का सब्र का बांध टूट गया। अधिकारियों के इस रवैये को अपनी तौहीन मानते हुए कमेटी ने तुरंत शाहाबाद-बराड़ा रोड को जाम करने का फैसला कर लिया। इस प्रदर्शन को तब और मजबूती मिली जब स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक के चेयरमैन और भाजपा नेता सुभाष कल्साना भी अपनी ही सरकार के प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने पहुंच गए।

धार्मिक स्थलों के पास गंदगी और नशे के कारोबार पर भड़के ग्रामीण

संघर्ष कमेटी ने साफ किया है कि यह लड़ाई इलाके की फिजा और माहौल को बचाने की है। कमेटी की मुख्य मांग है कि गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, कुटिया श्री गुरुदेव निवास और मुख्य स्वर्ग आश्रम के आसपास से अवैध कब्जों व अतिक्रमण को तुरंत साफ किया जाए। इसके अलावा डेहा कॉलोनी और बराड़ा रोड के मुख्य मार्गों पर हुए सरकारी जमीनों के कब्जों पर पीला पंजा चलाया जाए। ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप डेहा कॉलोनी में खुलेआम बिक रहे नशे को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस सिर्फ दिखावे की ‘टेंपरेरी’ कार्रवाई करती है, जबकि यहां बड़े नशा तस्करों पर सख्त और स्थायी कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।

दिसंबर से चल रही कागजी लड़ाई, अब आर-पार के मूड में जनता

यह आंदोलन कोई अचानक उपजा विवाद नहीं है, बल्कि पिछले छह महीनों से प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों के सब्र का नतीजा है। आंदोलन की पृष्ठभूमि को देखें तो इसकी शुरुआत पिछले साल 8 दिसंबर 2025 को नगरपालिका को दी गई पहली शिकायत से हुई थी। इसके बाद 26 मई 2026 को एसडीएम और 2 जून को जिला प्रशासन को भी चेताया गया।

कार्रवाई में ढील देखने के बाद 5 जून को सर्वसमाज ने पहली महापंचायत बुलाई, जिसके बाद संघर्ष कमेटी का गठन हुआ। प्रशासन ने 13 जून तक का वक्त मांगा था, लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा। रविवार को मौके पर पहुंचे तहसीलदार नवनीत ने आश्वासन देकर फिलहाल जाम तो खुलवा दिया है, लेकिन संघर्ष कमेटी ने साफ कर दिया है कि अगर 22 जून तक उनकी मांगें धरातल पर पूरी नहीं हुईं, तो इस बार दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे (NH-44 / जीटी रोड) को मुकम्मल तौर पर जाम कर दिया जाएगा।

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