कुरुक्षेत्र। पंजाब के पटियाला से लापता हुए एक बुजुर्ग किसान की तलाश हरियाणा के कुरुक्षेत्र की नहर में आकर खत्म हुई। झांसा क्षेत्र में एसवाइएल नहर के साइफन में फंसा हुआ एक शव बरामद हुआ, जिसकी शिनाख्त 63 वर्षीय भुलिंद्र सिंह निवासी सैदखेड़ी (पटियाला) के रूप में हुई है। भुलिंद्र सिंह पिछले 3 महीने से लापता थे और उनके एनआरआई बेटे मलकीत सिंह, जो पिता की तलाश में स्पेन से भारत लौटे थे, दिन-रात गोताखोरों के साथ नहर की खाक छान रहे थे।
पत्नी के जाने के बाद टूट चुके थे भुलिंद्र
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, भुलिंद्र सिंह पेशे से किसान थे और खुशहाल जीवन जी रहे थे। लेकिन करीब एक साल पहले उनकी पत्नी सुखविंद्र कौर का देहांत हो गया, जिसके बाद वे गहरे अवसाद में चले गए। मानसिक परेशानी और अकेलेपन के चलते वे अक्सर खोए-खोए रहने लगे थे। 4 मार्च की दोपहर करीब 12:30 बजे वे अपनी स्कूटी लेकर घर से निकले थे, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटे। बाद में उनकी स्कूटी मंडोली गांव के पास नहर किनारे लावारिस हालत में मिली, जिससे उनके नहर में डूबने का अंदेशा गहरा गया था।
सिम कार्ड और चाबियों ने मिटाया पहचान का संकट
हफ्तों तक गोताखोरों की टीम प्रगट सिंह और आशु की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच झांसा पुलिस को नहर में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली। शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी, लेकिन मृतक की जेब में रखा मोबाइल और सिम कार्ड सुरक्षित थे। पुलिस ने जब सिम को ट्रेस किया, तो कड़ियां पटियाला के सैदखेड़ी गांव से जाकर जुड़ीं। मौके पर पहुंचे बेटे मलकीत सिंह ने पिता की जेब से मिली घर और स्कूटी की चाबियों को देखकर दहाड़ मार कर रो पड़े।
स्पेन से लौटकर भी नहीं बचा सका बेटा
बेटे मलकीत सिंह ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह स्पेन में काम करता है, जबकि उसकी पत्नी और बच्चे पंजाब में पिता के पास ही रहते थे। पिता की मानसिक हालत बिगड़ने की खबर सुनकर उसने भारत आने की टिकट करवाई थी, लेकिन पिता ने फोन पर उसे आने से मना कर दिया था। हालांकि, पिता के लापता होने की खबर मिलते ही वह तीन दिन के भीतर वापस आ गया और तब से लगातार नहरों पर पहरा दे रहा था। मलकीत ने किसी भी तरह की साजिश से इनकार करते हुए इसे बीमारी और मानसिक तनाव के कारण उठाया गया कदम बताया है।
पुलिस की कार्रवाई और अंतिम विदाई
कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला प्रथम दृष्टया मानसिक परेशानी के चलते नहर में कूदने का लग रहा है। बेटे ने किसी पर कोई शक जाहिर नहीं किया है, जिसके आधार पर पुलिस ने इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई की है। तीन महीने की अनिश्चितता के बाद आखिरकार एक बेटे ने भारी मन से अपने पिता को अंतिम विदाई दी।

