Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Kurukshetra Youth Dies Armenia: कुरुक्षेत्र न्यूज: कर्ज लेकर भेजा था विदेश, अब आर्मेनिया से आएगी प्रवीन की अर्थी

GGaganpreet Kaur
कुरुक्षेत्र न्यूज: कर्ज लेकर भेजा था विदेश, अब आर्मेनिया से आएगी प्रवीन की अर्थी
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

शाहाबाद। नियति का क्रूर मजाक देखिए, जिस घर की दहलीज से गरीबी को विदा करने के लिए प्रवीन ने विदेश की राह चुनी थी, आज उसी घर में उसकी मौत की खबर ने कोहराम मचा दिया है। शाहाबाद के नगला गांव का 35 वर्षीय प्रवीन कुमार, जो अगस्त 2024 में सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर आर्मेनिया गया था, वहां एक खौफनाक हादसे का शिकार हो गया। प्रवीन की मौत न केवल एक परिवार का सहारा छीन ले गई, बल्कि पीछे छोड़ गई है वो कर्ज जिसे उतारने की जिम्मेदारी अब उसके लाचार और दिव्यांग पिता के कंधों पर है।

रसोई में खाना बनाते समय ‘काल’ बनी गैस पाइपलाइन

विज्ञापन

परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रवीन आर्मेनिया में एक किराए के कमरे में रहकर मेहनत-मजदूरी करता था। हादसा उस वक्त हुआ जब वह रोजाना की तरह काम से लौटकर अपने लिए खाना बना रहा था। अचानक रसोई की गैस पाइपलाइन में जोरदार धमाका हुआ और चंद सेकंड में पूरा कमरा आग के गोले में तब्दील हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि प्रवीन को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह बुरी तरह झुलस गया। मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया।

कर्ज लेकर भेजा था विदेश, अब शव लाने की भी हिम्मत नहीं

मृतक के पिता वेद प्रकाश, जो खुद चलने-फिरने में लाचार (दिव्यांग) हैं, ने रुंधे गले से बताया कि घर के हालात सुधारने के लिए उन्होंने पाई-पाई जोड़कर और लोगों से उधार लेकर प्रवीन को विदेश भेजा था। उन्हें उम्मीद थी कि बेटा वहां कमाएगा तो सिर से कर्ज का बोझ उतरेगा और घर में खुशहाली आएगी। प्रवीन भी दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहा था, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था। अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रवीन की पार्थिव देह को वतन लाने की है।

लाखों का खर्च और लाचार परिवार: सरकार से आस

शाहाबाद का यह पीड़ित परिवार अब प्रवीन के शव को आखिरी बार देखने के लिए तड़प रहा है, लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आ रही है। बताया जा रहा है कि आर्मेनिया से शव भारत लाने की प्रक्रिया में करीब 6 से 7 लाख रुपये का खर्च आएगा। एक ऐसा परिवार जो पहले से ही कर्ज के नीचे दबा हो, उसके लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना नामुमकिन है। गांव नगला के ग्रामीण और रिश्तेदार परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं और सरकार व विदेश मंत्रालय से अपील कर रहे हैं कि प्रवीन के शव को सरकारी खर्च पर वापस लाने का प्रबंध किया जाए ताकि उसका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में हो सके।

विज्ञापन

कुरुक्षेत्र की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।