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Anemia Mukt Bharat Ladwa: लाडवा में 1 जून से शुरू होगा एनीमिया के खिलाफ महाअभियान, 6,228 लोगों की होगी मुफ्त जांच

GGaganpreet Kaur
लाडवा में 1 जून से शुरू होगा एनीमिया के खिलाफ महाअभियान, 6,228 लोगों की होगी मुफ्त जांच
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लाडवा, (विजय कौशिक): देश को कुपोषण और खून की कमी जैसी साइलेंट किलर बीमारी से निजात दिलाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के दिशा-निर्देशानुसार, आगामी 1  जून 2026 से समूचे क्षेत्र में ‘अनीमिया मुक्त भारत’ अभियान का बकायदा आगाज होने जा रहा है। इस मुहिम का सीधा मकसद नवजात बच्चों, स्कूल जाने वाले किशोर-किशोरियों, गर्भवती माताओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी की समय रहते पहचान करना, उसकी रोकथाम करना और सही इलाज सुनिश्चित करना है।

84 हजार की आबादी पर पैनी नजर, इन श्रेणियों को किया गया चिह्नित

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाडवा के अंतर्गत इस पूरे अभियान का खाका बेहद बारीकी से तैयार किया गया है। इसके तहत सीएचसी के दायरे में आने वाली लगभग 84,777 की कुल आबादी के बीच सघन स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस आबादी में से 6,228 ऐसे लाभार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिनमें एनीमिया का खतरा सबसे ज्यादा होता है। विभाग की ओर से अलग-अलग आयु वर्ग के लिए जो कड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, वे कुछ इस प्रकार हैं:

6  से 59  महीने के मासूम बच्चे:1,136

5 से 9 वर्ष तक के बच्चे: 846

10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियां: 1,700

प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएं (WRA): 846

गर्भवती महिलाएं: 1,136

धात्री माताएं (स्तनपान कराने वाली): 564

जांच से लेकर पोषण परामर्श तक; गंभीर मरीजों को मुफ्त मिलेगा खून

इस विशेष स्वास्थ्य अभियान के दौरान केवल जांच ही नहीं होगी, बल्कि बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए चौतरफा रणनीति बनाई गई है। चयनित लाभार्थियों की हीमोग्लोबिन (HB) जांच के साथ-साथ उन्हें आयरन और फोलिक एसिड (IFA) की दवाइयां दी जाएंगी। इसके साथ ही, उनके खान-पान को सुधारने के लिए विशेष पोषण परामर्श (न्यूट्रिशन काउंसलिंग) सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिन मरीजों में खून की कमी ‘अति गंभीर’ स्तर पर पाई जाएगी, उन्हें तड़पने के लिए नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे गंभीर मरीजों को सरकारी खर्च पर फ्री एम्बुलेंस के जरिए तुरंत जिला स्तरीय बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका मुकम्मल इलाज होगा और यदि मरीज की जान बचाने के लिए जरूरत पड़ी, तो उन्हें बिल्कुल मुफ्त खून भी चढ़ाया जाएगा।

आशा और एएनएम संभालेंगी मोर्चा; डॉ. कृष्णकांत ने की सहयोग की अपील

जमीनी स्तर पर इस अभियान को कामयाब बनाने का पूरा जिम्मा स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) के कंधों पर होगा। ये स्वास्थ्य कर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक लाएंगे और मौके पर ही दवाइयों का वितरण करेंगे।

अभियान के सूत्रधार और लाडवा सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्णकांत ने इस संबंध में प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की आने वाली पीढ़ी की सेहत से जुड़ा संवेदनशील मामला है। उन्होंने क्षेत्र के तमाम प्रबुद्ध नागरिकों, पंचायतों और परिवारों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। अपने बच्चों और घर की महिलाओं की जांच अवश्य कराएं ताकि एक स्वस्थ और एनीमिया मुक्त समाज का सपना हकीकत में बदला जा सके।

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