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Ladwa Music Workshop 2026: लाडवा में संगीत का महाकुंभ: बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम में 15 दिवसीय कार्यशाला शुरू, बच्चे सीखेंगे सुर-ताल

GGaganpreet Kaur
लाडवा में संगीत का महाकुंभ: बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम में 15 दिवसीय कार्यशाला शुरू, बच्चे सीखेंगे सुर-ताल
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लाड़वा (विजय कौशिक) सनातन और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में लाडवा में एक सराहनीय प्रयास शुरू हुआ है। भारत विकास परिषद की लाडवा शाखा की ओर से स्थानीय बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम में 15 दिवसीय संगीत कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अनूठे शिविर को शुरू करने के पीछे परिषद का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं के भीतर छिपी संगीत की प्रतिभा को तराशना, उनके मानसिक संतुलन को बेहतर करना और देश के पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है।

सुबह और शाम सजेगी महफिल; स्वर, लय और ताल की बारीकियां सीखेंगे बच्चे

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कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन के बाद परिषद के अध्यक्ष राजीव आर्य ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने बेहद सटीक शब्दों में कहा कि संगीत सिर्फ मनोरंजन या शौक पूरा करने का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में अनुशासन, एकाग्रता और व्यक्तित्व के निर्माण का एक सशक्त माध्यम है। प्रकल्प प्रमुख कुंवर सिंघल ने कार्यशाला की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 14 से लेकर 28 जून तक चलने वाले इस शिविर में समय का विशेष ध्यान रखा गया है। बच्चों की सहूलियत के लिए सुबह 5 से 7 बजे और दोपहर बाद 3 से 5 बजे तक दो सत्रों में गायन व वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

संगीतकार दिलावर कौशिक की देखरेख में होगा रियाज, देशभक्ति और भजनों पर रहेगा जोर

इस पूरे कैंप के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे जाने-माने संगीतकार दिलावर कौशिक ने बताया कि 15 दिनों के इस सफर में बच्चों को सीधे रटने की बजाय संगीत के व्याकरण से जोड़ा जाएगा। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की टीम नवोदित कलाकारों को स्वर साधना, लय-ताल की समझ, शास्त्रीय संगीत के मूलभूत नियमों के साथ-साथ भजनों और देशभक्ति गीतों का कड़ा अभ्यास कराएगी। परिषद के वरिष्ठ सदस्यों ने भी इस मौके पर बच्चों को रोज अभ्यास में शामिल होने और इस मौके का पूरा फायदा उठाने के लिए प्रेरित किया।

समाज और संस्कृति को सहेजने की मुहिम; अभिभावकों ने भी सराहा

इस उद्घाटन समारोह के दौरान न केवल भारत विकास परिषद के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, बल्कि वृद्धाश्रम के प्रतिनिधि, बच्चों के अभिभावक और बड़ी संख्या में स्थानीय संगीत प्रेमी भी इस पल के गवाह बने। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों ने परिषद की इस अनूठी पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि आज के चकाचौंध वाले दौर में जब युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर भाग रहे हैं, ऐसे समय में अपनी माटी के शास्त्रीय संगीत और कला को सहेजने का यह प्रयास वाकई तारीफ के काबिल है।

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