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Ladwa Globe Heritage School: लाडवा के ग्लोब हेरिटेज स्कूल में आपदा प्रबंधन पर मंथन, शिक्षकों को सिखाए गए सुरक्षा के गुर

GGaganpreet Kaur
लाडवा के ग्लोब हेरिटेज स्कूल में आपदा प्रबंधन पर मंथन, शिक्षकों को सिखाए गए सुरक्षा के गुर
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लाडवा (कैलाश गोयल): शिक्षा के बदलते परिवेश में अब स्कूलों की जिम्मेदारी सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि किसी भी अप्रत्याशित संकट से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना भी इसका एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। इसी सोच के साथ लाडवा के ग्लोब हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षकों के व्यावसायिक और व्यावहारिक विकास को मजबूती देने के लिए ‘आपदा प्रबंधन’ विषय पर एक दिवसीय इनहाउस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र में स्कूल के तमाम शिक्षकों ने बेहद गंभीर और उत्साहजनक माहौल में हिस्सा लिया।

सुरक्षा सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी: प्रधानाचार्या रीतू सिंगला

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कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्रधानाचार्या रीतू सिंगला द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्या ने एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

“आज के दौर में स्कूलों के लिए सिर्फ बेहतरीन शिक्षा देना ही काफी नहीं है। हमारे परिसर में कदम रखने वाले हर विद्यार्थी और कर्मचारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। प्राकृतिक या इंसानी गलतियों से आने वाली आपदाओं के प्रति जागरूक रहना और संकट के समय बिना वक्त गंवाए सही फैसला लेना हर शिक्षक की जिम्मेदारी है। इस तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम शिक्षकों को विपरीत परिस्थितियों में एक कुशल लीडर की भूमिका निभाने के लिए तैयार करते हैं।”

घबराहट नहीं, पहले से तैयार ब्लूप्रिंट आएगा काम: अमित सिंघल

कार्यशाला के मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद सीबीएसई रिसोर्स पर्सन और मास्टर ट्रेनर अमित सिंघल ने आपदा प्रबंधन की बारीकियों को बेहद सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने स्कूल सुरक्षा योजना, रिस्क मैनेजमेंट (जोखिम न्यूनीकरण), आपातकालीन निकासी (इवैक्युएशन प्रोसेस) और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से बात की।

सिंघल ने साफ शब्दों में कहा कि जब भी कोई आपदा आती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान डर और भगदड़ की वजह से होता है। ऐसे में घबराने के बजाय अगर स्कूल के पास पहले से तैयार और जांची-परखी कोई कार्ययोजना (प्लान) हो, तो नुकसान को कम से कम किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में नियमित रूप से मॉक ड्रिल होनी चाहिए और बच्चों को सुरक्षा संबंधी व्यावहारिक कमान सिखाई जानी चाहिए ताकि वे किसी भी हालात के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें।

रियल लाइफ केस स्टडीज से सीखीं बारीकियां

इस ट्रेनिंग सेशन को केवल किताबी व्याख्यान तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसमें शिक्षकों को असल जिंदगी की घटनाओं (केस स्टडीज) और ग्रुप एक्टिविटीज से जोड़ा गया। शिक्षकों ने सामूहिक रूप से इस बात पर मंथन किया कि अगर अचानक भूकंप आ जाए, शॉर्ट सर्किट से आग लग जाए, या फिर क्षेत्र में बाढ़ और अत्यधिक लू (हीटवेव) जैसी स्थितियां बन जाएं, तो बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

सत्र के समापन पर शिक्षकों ने अपने पुराने अनुभव साझा किए और स्कूल परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी दिए। सभी प्रतिभागियों ने इस आयोजन को बेहद समयोचित और ज्ञानवर्धक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित करने की मांग की।

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