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Jindal Park Ladwa: लाडवा के जिंदल पार्क में भारत विकास परिषद की अनूठी पहल, प्लास्टिक छोड़ कपड़े के थैले अपनाने की अपील

GGaganpreet Kaur
लाडवा के जिंदल पार्क में भारत विकास परिषद की अनूठी पहल, प्लास्टिक छोड़ कपड़े के थैले अपनाने की अपील
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लाडवा (कैलाश गोयल): आधुनिकता की दौड़ में जहां प्लास्टिक हमारे जीवन का एक अनचाहा लेकिन जरूरी हिस्सा बन चुका है, वहीं इसके दुष्परिणाम अब हमारी प्रकृति और सेहत पर साफ दिखने लगे हैं। इसी गंभीर विषय को लेकर समाजसेवा और पर्यावरण चेतना में अग्रणी संस्था ‘भारत विकास परिषद’ की लाडवा शाखा ने एक सराहनीय कदम उठाया है। परिषद की ओर से लाडवा के जिंदल पार्क में एक विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसके तहत वहां मौजूद आमजन को कपड़े के थैले बांटे गए। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य लोगों को ‘प्लास्टिक मुक्त’ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

धरती को निगल रहा है प्लास्टिक, कपड़े के थैले ही एकमात्र विकल्प: शिवानी गर्ग

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कार्यक्रम के दौरान मौजूद नागरिकों और सुबह की सैर पर निकले लोगों को संबोधित करते हुए परिषद की पर्यावरण गतिविधि संयोजिका शिवानी गर्ग ने प्लास्टिक के कचरे से पैदा हो रहे खतरों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बेहद सरल शब्दों में समझाते हुए कहा:

“प्लास्टिक की जो थैलियां हम चंद मिनटों के इस्तेमाल के बाद फेंक देते हैं, वे सैकड़ों सालों तक हमारी मिट्टी और पानी को जहरीला बनाती रहती हैं। इसके विपरीत, कपड़े के थैले न सिर्फ टिकाऊ और दोबारा इस्तेमाल के योग्य होते हैं, बल्कि वे पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) हैं। अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ और सांस लेने योग्य धरती सौंपनी है, तो आज ही से हमें अपनी आदतों को बदलना होगा और बाजार जाते समय घर से कपड़े का थैला साथ ले जाने की आदत डालनी होगी।”

सामूहिक प्रयासों से ही थमेगा प्रदूषण का तांडव: संजीव मंगला

वहीं, संस्था के सचिव संजीव मंगला ने नागरिक कर्तव्यों को याद दिलाते हुए कहा कि पर्यावरण को बचाना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक समाज का हर व्यक्ति इस मुहिम से खुद को नहीं जोड़ेगा, तब तक कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में किए गए हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही आगे चलकर एक बड़े और हरित बदलाव की नींव बनते हैं।

इस दौरान पार्क में मौजूद बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भारत विकास परिषद के इस जमीनी प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर वहां मौजूद सभी लोगों ने एक सुर में यह प्रतिज्ञा ली कि वे अपनी रोजमर्रा की खरीदारी में प्लास्टिक की थैलियों को पूरी तरह ‘नो’ कहेंगे और एक स्वच्छ, सुंदर व हरित लाडवा के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

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