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Jaspal Rana Tribute Ladwa: मनु भाकर के गुरु और पद्म श्री जसपाल राणा के निधन से खेल जगत स्तब्ध, लाडवा में शोक सभा

GGaganpreet Kaur
मनु भाकर के गुरु और पद्म श्री जसपाल राणा के निधन से खेल जगत स्तब्ध, लाडवा में शोक सभा
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लाडवा (कैलाश गोयल) दिग्गज निशानेबाज और भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले पद्म श्री जसपाल राणा के असामयिक निधन से खेल जगत स्तब्ध है। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के लाडवा स्थित संजय गांधी मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल की नवीन जिंदल शूटिंग रेंज में एक विशेष शोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्कूल के प्रधान पवन गर्ग, प्रधानाचार्य नरेंद्र शर्मा और विख्यात शूटिंग कोच बलबीर सिंह सहित तमाम शिक्षकों और युवा खिलाड़ियों ने इस महान खिलाड़ी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी तस्वीर पर पुष्प चक्र चढ़ाए।

देश ने खो दिया शूटिंग का ‘द्रोणाचार्य’

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श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए स्कूल के प्रधान पवन गर्ग ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि जसपाल राणा का इस तरह अचानक चले जाना पूरे देश और खेल जगत के लिए एक वज्रपात जैसा है। उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। जसपाल राणा सिर्फ एक शूटर नहीं, बल्कि भारत में निशानेबाजी के खेल की पहचान थे। उन्होंने अपनी अचूक गन से राष्ट्रमंडल खेलों में 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक जीतकर दुनिया में भारत का डंका बजाया था। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने 3 स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किया था।

मनु भाकर को तराशने वाले जौहरी थे राणा

जसपाल राणा ने न सिर्फ खुद देश के लिए पदक जीते, बल्कि बतौर कोच उन्होंने देश को ऐसे निशानेबाज दिए जिन पर आज हर भारतीय को गर्व है। पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने वाली भारतीय महिला निशानेबाज मनु भाकर को इस मुकाम तक पहुंचाने के पीछे जसपाल राणा की कड़ी मेहनत और सटीक मार्गदर्शन ही था। उनकी इसी खेल प्रतिभा और कोचिंग के हुनर के कारण उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार, पद्म श्री और खेल गुरुओं को मिलने वाले द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया था।

उभरते खिलाड़ियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे जसपाल

स्कूल के प्रधानाचार्य नरेंद्र शर्मा ने कहा कि जसपाल राणा ने भारतीय खेल इतिहास में जो स्वर्णिम अध्याय लिखा है, वह हमेशा अमर रहेगा। उनकी शहादत जैसी खेल तपस्या आने वाली पीढ़ियों और देश के युवा निशानेबाजों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी कि कैसे विपरीत हालातों में भी देश का तिरंगा ऊंचा रखा जाता है। इस दौरान शूटिंग रेंज के युवा खिलाड़ियों ने भी दो मिनट का मौन रखकर अपने आदर्श को याद किया।

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