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Ladwa Stray Horses Menace: सीएम सिटी लाडवा में आवारा घोड़ों का आतंक, सड़कों पर चलना हुआ मुहाल, नपा बेअसर

GGaganpreet Kaur
सीएम सिटी लाडवा में आवारा घोड़ों का आतंक, सड़कों पर चलना हुआ मुहाल, नपा बेअसर
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लाडवा (कैलाश गोयल)। वीआईपी विधानसभा क्षेत्र का तमगा मिलने के बाद जहां लाडवा के लोग विकास की नई इबारत लिखे जाने की उम्मीद कर रहे थे, वहीं शहर की पुरानी और ढांचागत समस्याएं अब नासूर बनती जा रही हैं। पालिका बाजार से लेकर गली-मोहल्लों तक इन दिनों आवारा घोड़ों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का पैदल निकलना भी दूभर हो चुका है। भूखे और डरे हुए ये पशु अचानक आक्रामक होकर राहगीरों और दुपहिया वाहन चालकों पर हमला कर देते हैं, जिससे कई लोग गंभीर रूप से चोटिल हो चुके हैं।

मालिक कमा रहे मुनाफा, जनता भुगत रही खमियाजा; एडवोकेट योध राज बंसल ने उठाए सवाल

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लाडवा के जाने-माने समाजसेवी और वरिष्ठ अधिवक्ता योध राज बंसल ने इस गंभीर मुद्दे पर सीधे तौर पर प्रशासन और स्वार्थी पशु मालिकों को आड़े हाथों लिया है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “यह बेहद चिंताजनक है कि पुराने थाने के नजदीक पालिका बाजार जैसे व्यस्ततम इलाके में हर समय 4-5 घोड़े सड़कों के बीचो-बीच खड़े रहते हैं। लोग इन मूक पशुओं से आर्थिक लाभ तो पूरा लेते हैं, लेकिन जैसे ही इनका सीजन खत्म होता है या ये बूढ़े हो जाते हैं, इन्हें सड़कों पर मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया जाता है।” बंसल ने जोर देकर कहा कि जब तक इन पशुओं के मालिकों पर भारी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी।

‘माइक्रोचिपिंग’ है एकमात्र रास्ता; ठंडे बस्ते में पड़े हैं सरकारी वादे

शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान तकनीक के जरिए ही संभव है। स्थानीय निवासी शिव कुमार, प्रदीप कुमार, देवेंद्र सिंह और सतीश कुमार ने सामूहिक रूप से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे इस समस्या को लेकर कई बार नगरपालिका के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।

क्या है माइक्रोचिपिंग? पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सभी पालतू और व्यावसायिक घोड़ों की गर्दन में एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक ‘माइक्रोचिप’ लगा दी जाए, तो सड़क पर घूमते ही स्कैनर के जरिए उसके असली मालिक की पहचान तुरंत हो जाएगी। इससे मालिक कानूनी कार्रवाई के डर से पशुओं को खुला छोड़ने की हिम्मत नहीं करेंगे।

नागरिकों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जल्द ही कोई विशेष ‘कैटल पाउंड’ (पशु बाड़ा) या सरकारी अस्तबल नहीं बनाया गया, तो वे मजबूरन जिला उपायुक्त (DC) को ज्ञापन सौंपकर उग्र प्रदर्शन करेंगे।

मुख्यमंत्री की विधानसभा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जल्द होगी कार्रवाई: नपा सचिव नीरज सैनी

दूसरी ओर, मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आता दिख रहा है। लाडवा नगरपालिका के सचिव नीरज सैनी ने बताया कि यह विषय हाल ही में उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा, “मैंने तुरंत प्रभाव से नपा के फील्ड स्टाफ को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे शहर में घूम रहे घोड़ों के मालिकों को चिह्नित करें। सभी संदिग्ध मालिकों को कानूनी नोटिस थमाया जा रहा है।”

सचिव ने साफ किया कि चूंकि लाडवा स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का गृह क्षेत्र है, इसलिए जनसमस्याओं के निस्तारण में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि आने वाले कुछ ही दिनों में विशेष अभियान चलाकर सड़कों को इन बेसहारा पशुओं से मुक्त करा लिया जाएगा।

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