Delhi Hunger Strike: 23 दिन बाद खत्म हुई AISA छात्रों की भूख हड़ताल, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
जंतर-मंतर पर 23 दिन बाद खत्म हुई AISA छात्रों की भूख हड़ताल
Delhi Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों और अन्य मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में सोमवार को अहम घटनाक्रम सामने आया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन कार्यकर्ताओं ने भी 23 दिनों से जारी आमरण अनशन खत्म करने की घोषणा की। आंदोलन से जुड़े लोगों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त हुई है, लेकिन उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। जंतर-मंतर पर पिछले कई सप्ताह से बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक जुटकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रहे थे। सोमवार को हुए घटनाक्रम को आंदोलन के अगले चरण की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
सोनम वांगचुक के आग्रह पर दीपके ने तोड़ा अनशन
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्होंने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आग्रह पर अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। दीपके ने अपना आमरण अनशन उस समय शुरू किया था, जब 18 जुलाई को लगातार 21 दिन की भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद दीपके ने आंदोलन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया था।
जेपी नड्डा से मिलने निकले CJP प्रतिनिधि
इसी बीच CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रंका सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के लिए रवाना हुए। पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक जंतर-मंतर पर एकत्र रहे और परीक्षा सुधारों, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव तथा अन्य मांगों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते रहे। संगठन का कहना है कि सरकार से बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।
AISA के तीन कार्यकर्ताओं ने भी समाप्त किया अनशन
उधर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन कार्यकर्ताओं नेहा, मनीष और आमीन ने भी अपनी 23 दिन की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने यह फैसला विपक्षी सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों के प्रतिनिधिमंडल की अपील के बाद लिया। बारिश के बीच जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में तीनों ने अपना अनशन समाप्त किया।
प्रतिनिधिमंडल ने संसद में मुद्दा उठाने का दिया भरोसा
प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही राजनीतिक और जन-अभियानों के माध्यम से भी इन मुद्दों को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सांसद मनोज झा, CPI(M) सांसद अमरा राम, CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, राजाराम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और शिक्षाविद अतुल सूद शामिल थे।
प्रकाश राज और शबाना आजमी ने की अनशन समाप्त करने की अपील
अभिनेता प्रकाश राज और अभिनेत्री शबाना आजमी भी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने छात्रों से कहा कि भूख हड़ताल समाप्त करने का अर्थ संघर्ष समाप्त करना नहीं है। उन्होंने इसे आंदोलन के एक चरण का समापन बताते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से आगे भी लड़ाई जारी रखने की अपील की।
23 दिन में 12 फीसदी से ज्यादा घटा वजन
AISA के अनुसार, लगातार 23 दिन की भूख हड़ताल के दौरान तीनों छात्रों का वजन 12 प्रतिशत से अधिक कम हो गया था। संगठन ने दावा किया कि उनका रक्त शर्करा स्तर भी खतरनाक रूप से नीचे पहुंच गया था और स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था। इसके बावजूद तीनों कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। AISA के मुताबिक यह अनशन 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा था।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की न्यायिक जांच, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी उठा रहे हैं। संगठनों का कहना है कि भूख हड़ताल समाप्त होने के बावजूद इन मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और जनसंपर्क अभियान आगे भी जारी रहेगा।
