Himachal Pradesh News: हिमाचल के किसानों को बड़ी सौगात, सीपीआरआई की दो नई आलू की किस्मों को मिली केंद्र की मंजूरी
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला द्वारा विकसित आलू की दो उन्नत किस्मों कुफरी अभेद्य और कुफरी रूबी को खेती के लिए आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। 8 जुलाई को केंद्र सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के बाद अब इन किस्मों के गुणवत्तायुक्त बीजों का उत्पादन, प्रमाणीकरण और बिक्री अनुशंसित क्षेत्रों में की जा सकेगी। इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश समेत देश के कई पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों के किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नई किस्में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रोगों से होने वाले नुकसान को भी कम करेंगी।
हिमाचल के हजारों किसानों के लिए क्यों है अहम फैसला
हिमाचल प्रदेश में आलू प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और राज्य के हजारों किसान इसकी खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में नई किस्मों को मिली मंजूरी का सीधा लाभ पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों तक पहुंचेगा। सीपीआरआई के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि यह अधिसूचना हिमाचल के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि कुफरी अभेद्य को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों, तमिलनाडु के नीलगिरि क्षेत्र तथा कर्नाटक और महाराष्ट्र के पठारी इलाकों के लिए अनुशंसित किया गया है। उनके अनुसार यह किस्म किसानों को अधिक उत्पादन देने के साथ प्रमुख रोगों से भी सुरक्षा प्रदान करेगी, जिससे खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सकेगी।
कुफरी अभेद्य की क्या हैं खास खूबियां
सीपीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं आलू प्रजनन वैज्ञानिक डॉ. शैलेज सूद ने बताया कि कुफरी अभेद्य मध्यम अवधि में तैयार होने वाली उच्च उत्पादक टेबल आलू की किस्म है। इसकी फसल लगभग 110 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और खरीफ मौसम में 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लेट ब्लाइट और पोटेटो सिस्ट निमेटोड (PCN) जैसे आलू की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख रोगों के प्रति उच्च स्तर का प्रतिरोध पाया जाता है। इससे किसानों को बार-बार रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल कम करना पड़ेगा और खेती की लागत में भी कमी आएगी।
देश की पहली उच्च उत्पादक रोग-प्रतिरोधी किस्म
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय पर्वतीय क्षेत्रों में आलू की खेती को प्रभावित करने वाले इन दोनों प्रमुख जैविक कारकों के प्रति प्रतिरोधी यह देश की पहली उच्च उत्पादक आलू किस्म मानी जा रही है। रोग प्रतिरोधी होने के कारण फसल खराब होने का जोखिम कम होगा। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता पहले की तुलना में कम होगी।
बेहतर गुणवत्ता और भंडारण क्षमता भी बनेगी फायदा
कुफरी अभेद्य के कंद पीले छिलके और गुलाबी छींटों वाले आकर्षक दिखाई देते हैं। इसका गूदा क्रीम रंग का होता है और इसकी भंडारण क्षमता भी बेहतर बताई गई है। इसी वजह से यह किस्म टेबल उपयोग के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। बेहतर गुणवत्ता वाले आलू मिलने से किसानों को बाजार में भी अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
बीज प्रणाली होगी मजबूत, बढ़ेगी किसानों की आय
डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि दोनों नई किस्मों की अधिसूचना भारत में जलवायु के अनुरूप, रोग-प्रतिरोधी और बाजार की मांग के अनुसार आलू की उन्नत किस्में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इससे गुणवत्तायुक्त बीज प्रणाली को मजबूती मिलेगी, नई कृषि तकनीकों का तेजी से विस्तार होगा और किसानों की उत्पादकता तथा आय में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत होगी।
