Mandi Ateli News: 1962 के शहीद रोहतास सिंह के नाम से जाना जाएगा चंदपुरा का सरकारी स्कूल, बेटे ने 3 साल लड़ी कानूनी जंग
Mandi Ateli News: 1962 के शहीद रोहतास सिंह के नाम से जाना जाएगा चंदपुरा का सरकारी स्कूल, बेटे ने 3 साल लड़ी कानूनी जंग
Mandi Ateli News: देश की सरहदों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले अमर शहीदों को सम्मान देना ही किसी राष्ट्र की वास्तविक धरोहर और नैतिक कर्तव्य होता है। इसी कड़ी में महेंद्रगढ़ जिले के अटेली क्षेत्र स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चंदपुरा को अब एक नई और गौरवमयी पहचान मिल गई है। इस विद्यालय का नाम बदलकर ‘बलिदानी रोहतास सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय’ कर दिया गया है।
यह महज किसी इमारत पर लिखे पन्नों या अक्षरों का बदलाव नहीं है, बल्कि एक बेटे के अटूट संकल्प, तीन साल लंबे संघर्ष और देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि की एक भावुक दास्तान है।
अमल में आई हाईकोर्ट की फटकार, बेटे के संघर्ष की हुई जीत
बलिदानी रोहतास सिंह के पुत्र सुरेश कुमार ने अपने पिता की स्मृतियों को भावी पीढ़ियों के दिलों में जिंदा रखने के लिए गांव के सरकारी स्कूल का नाम उनके नाम पर करवाने का बीड़ा उठाया था। हालांकि, यह राह आसान नहीं रही। इसके लिए उन्हें लगभग 2 साल और 11 महीने तक सरकारी दफ्तरों की धूल छाननी पड़ी और प्रशासनिक चौखटों पर गुहार लगानी पड़ी।
जब लगातार मिन्नतों के बावजूद लालफीताशाही के बीच फाइलें दबा दी गईं, तो सुरेश कुमार ने न्याय की उम्मीद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के हस्तक्षेप और सख्त रुख के बाद आखिरकार जिला व शिक्षा प्रशासन हरकत में आया। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए विभाग ने विद्यालय का नाम शहीद रोहतास सिंह के नाम पर करने की आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी।
1962 के युद्ध में चीन से लिया था लोहा, तत्कालीन पीएम नेहरू ने भेजा था पत्र
वीर बलिदानी रोहतास सिंह ने वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान अदम्य साहस और युद्ध कौशल का परिचय देते हुए दुश्मन सेना के दांत खट्टे किए थे। मातृभूमि की अस्मिता बचाते हुए वे मोर्चे पर शहीद हो गए थे। उनके इस अप्रतिम पराक्रम को नमन करते हुए देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खुद अपने हाथों से हस्तलिखित पत्र भेजकर परिवार को ढांढस बंधाया था।
इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके बलिदान को स्मरण करते हुए हस्ताक्षरयुक्त स्मृति चिह्न भेजकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। यह सम्मान केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा और देश के उस वीर पुत्र का है जिसने वतन की खातिर अपनी शहादत दी।
दो-तीन दिनों में लगेगा नया बोर्ड: प्राचार्या
विद्यालय के प्राचार्य के मुताबिक, नाम परिवर्तन से संबंधित विभागीय मंजूरी का आधिकारिक पत्र प्राप्त हो चुका है। अब स्कूल रिकॉर्ड और कागजी औपचारिकताओं को तेजी से अपडेट किया जा रहा है। अगले दो से तीन दिनों के भीतर विद्यालय के मुख्य द्वार और भवन पर आधिकारिक रूप से बलिदानी रोहतास सिंह का नाम अंकित कर नया बोर्ड स्थापित कर दिया जाएगा, जो आने वाली नस्लों को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।
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