Pehowa Guru Purnima: पिहोवा के संगमेश्वर महादेव अरुणाय में गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब, महंतों से लिया आशीर्वाद
पिहोवा के संगमेश्वर महादेव अरुणाय में गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब, महंतों से लिया आशीर्वाद
Pehowa Guru Purnima: पवित्र धर्मनगरी पिहोवा और आसपास के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। प्रसिद्ध संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय, श्री पृथ्वेश्वर महादेव मंदिर (बड़ा शिवालय) और मॉडल टाउन स्थित श्री दक्षिणा काली पीठ में तड़के से ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने अपने-अपने गुरुजनों व संत-महात्माओं का चरण-पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और कई श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा (नामदान) भी ली।
अरुणाय धाम में महायज्ञ और विशाल भंडारा
संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में मंदिर सचिव महंत विश्वनाथ गिरी के सानिध्य में विशेष पूजन व हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। इस मौके पर महंत विश्वनाथ गिरी ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का अलौकिक प्रकाश फैलाते हैं। बिना गुरु की कृपा के मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति असंभव है। अनुष्ठान के उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं तथा साधु-संतों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही मंदिर परिसर में सावन महीने के पावन धार्मिक आयोजनों की शुरुआत भी हो गई।
10 अगस्त को लगेगा महाशिवरात्रि मेला, 25 को भव्य शोभायात्रा
आगामी आयोजनों की जानकारी देते हुए महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि 10 अगस्त को सावन माह की महाशिवरात्रि का ऐतिहासिक मेला आयोजित किया जाएगा। देश के विभिन्न हिस्सों से कांवड़ में गंगाजल लेकर आने वाले भक्त 10 अगस्त की मध्यरात्रि के बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। वहीं, 25 अगस्त को क्षेत्र में एक विशाल व भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं।
‘गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही संभव है कल्याण’
उधर, श्री दक्षिणा काली पीठ में आयोजित धार्मिक समारोह के दौरान संस्था के संस्थापक श्रीमहंत बंसी पुरी महाराज ने अपने प्रवचनों से संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि तत्व ज्ञान का वो पुंज हैं जो मानव जीवन को सही दिशा दिखाते हैं। उनके सानिध्य में ही व्यक्ति में विवेक और उच्च संस्कारों का बीजारोपण होता है। श्रीमहंत ने जोर देकर कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने गुरु के आदर्शों और उपदेशों को आचरण में ढाल ले, तो न केवल उसका व्यक्तिगत जीवन सफल होगा, बल्कि समाज और राष्ट्र का भी समग्र कल्याण संभव हो सकेगा।
