Haryana Weather Update: जून के महीने में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी झेल रहे हरियाणा के लोगों के लिए मौसम का मिजाज आखिरकार बदल गया है। चिलचिलाती धूप और उमस के बीच प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों ने दस्तक दे दी है, जिससे अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने ताजा बुलेटिन जारी कर आगामी 24 जून तक राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी हवाएं चलने की भी उम्मीद है, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
महेंद्रगढ़ से सिरसा तक मौसम विभाग का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने विशेष रूप से महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी और चरखी दादरी जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में आसमान में घने बादल छाए रहने के साथ-साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक के बाद एक सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवाओं के रुख में बदलाव आया है।
अगले दो दिनों में राज्य के औसत तापमान में 3 डिग्री तक की कमी आएगी, हालांकि इसके बाद के तीन दिनों में पारा दोबारा दो से तीन डिग्री चढ़ सकता है। लेकिन बीच-बीच में होने वाली बूंदाबांदी से लू का असर पूरी तरह गायब रहेगा।
रोहतक रहा सबसे गर्म, महेंद्रगढ़ में पारा लुढ़का
अगर पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो रोहतक जिला पूरे हरियाणा में सबसे ज्यादा तप रहा था। यहां रविवार को अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके उलट अंबाला और सिरसा में पारा 40.6 डिग्री तथा हिसार में 40.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। वहीं, दक्षिणी हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में मौसम सबसे सुहावना रहा, जहां अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे 37.3 डिग्री सेल्सियस पर आकर टिक गया। मौसम में आए इस बदलाव ने धान की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों के चेहरे पर भी रौनक ला दी है।
आंधी और आकाशीय बिजली को लेकर प्रशासन सतर्क, एडवाइजरी जारी
मौसम में अचानक आ रहे इस बदलाव को देखते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने आम जनता के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। कृषि विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब भी आसमान में बिजली कड़के या तेज आंधी आए, तो सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। लोगों को हिदायत दी गई है कि वे तेज हवाओं के दौरान बड़े पेड़ों, पुराने बिजली के खंभों और कमजोर व अस्थायी ढांचों (जैसे टिन शेड) के नीचे बिल्कुल खड़े न हों। खुले मैदानों में काम कर रहे किसानों को भी मौसम खराब होते ही पक्के मकानों या सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है।

