Kurukshetra News: श्री गुरु रविदास मंदिर सभा के चुनाव 5वीं बार स्थगित, भड़के समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी2024 से लटके हैं गुरु रविदास सभा के चुनाव, पूर्व प्रधान ने बुलाई समाज की महापंचायत

Kurukshetra News: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र से सामाजिक और धार्मिक राजनीति को गर्माने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। श्री गुरु रविदास मंदिर एवं धर्मशाला सभा के बहुप्रतीक्षित चुनाव को एक बार फिर टाल दिया गया है। यह कोई पहली या दूसरी बार नहीं, बल्कि लगातार पांचवां मौका है जब चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही प्रशासन ने अपने हाथ पीछे खींच लिए।

शनिवार को जैसे ही नामांकन की प्रक्रिया पर रोक लगने की आधिकारिक पुष्टि हुई, समाज के भीतर का गुस्सा फूट पड़ा। जगह-जगह चौपालों और बैठकों में सरकार और स्थानीय प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये की तीखी आलोचना हो रही है।

नामांकन के ठीक पहले बदला फैसला, सुगबुगाहट तेज

तय कार्यक्रम के मुताबिक, 27 और 28 जून को कोलेजियम सदस्यों के चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जाने थे। समाज के विभिन्न गुट अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतरने को तैयार थे, लेकिन अचानक रिटर्निंग अधिकारी-कम-जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) की ओर से एक नोटिस चस्पा कर दिया गया।

इस नोटिस में सिर्फ इतना लिखा था कि ‘प्रशासनिक कारणों’ से चुनाव आगामी आदेश तक स्थगित किए जाते हैं। इस बीच, संस्था का कामकाज देखने के लिए एक नए प्रशासक की नियुक्ति भी कर दी गई है, जिससे यह साफ है कि अंदरूनी खींचतान और प्रशासनिक पेच अभी सुलझे नहीं हैं।

दो साल से चल रही है ‘तारीख पर तारीख’

आपको बता दें कि इस प्रतिष्ठित सभा की प्रबंधक कमेटी का कार्यकाल अक्टूबर 2024 में ही पूरा हो चुका है। तब से लेकर अब तक लोकतांत्रिक तरीके से नई कमेटी का गठन हो जाना चाहिए था।

पिछले दो सालों में कई बार चुनावी शेड्यूल जारी हुए, ढोल-नगाड़ों के साथ तारीखों का ऐलान हुआ, लेकिन हर बार ऐन वक्त पर आकर कहानी अटक जाती है। इससे पहले जून महीने में ही 20 और 21 तारीख को पर्चे भरे जाने थे, जिसे एक हफ्ते के लिए आगे बढ़ाया गया था और अब नई तारीख को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

विकास कार्य ठप, पूर्व प्रधान सूरजभान नरवाल ने दी आंदोलन की चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए मंदिर कमेटी के पूर्व प्रधान सूरजभान नरवाल ने कहा कि बार-बार चुनाव स्थगित होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, “इस प्रशासनिक लेती-देती के कारण दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच रही है।

मंदिर और धर्मशाला के कई बड़े विकास कार्य लंबे समय से लटके पड़े हैं क्योंकि कोई स्थायी कमेटी नहीं है।” नरवाल ने एलान किया है कि वे इस ढर्रे को और बर्दाश्त नहीं करेंगे और जल्द ही समाज के सभी प्रबुद्ध नागरिकों की महापंचायत बुलाकर सड़क पर उतरने और आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।