sant-nishchal-singh-school-ladwa: (कैलाश गोयल) आज के तेजी से बदलते और प्रतिस्पर्धी दौर में कॉमर्स स्ट्रीम के सबसे महत्वपूर्ण विषय ‘अकाउंट्स’ को विद्यार्थियों के लिए हौव्वा नहीं, बल्कि पसंदीदा विषय बनाने के लिए लाडवा में एक बड़ी पहल की गई है। इंद्री रोड स्थित संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल के परिसर में अकाउंट्स विषय पर आधारित एक दिवसीय प्रांतीय कार्यशाला का शानदार आयोजन हुआ। इस हाई-प्रोफाइल कार्यशाला में कुरुक्षेत्र, अंबाला और यमुनानगर के करीब 60 से अधिक नामचीन सीबीएसई विद्यालयों के अकाउंट्स प्रवक्ताओं ने शिरकत की। पूरे दिन चले इस सघन प्रशिक्षण सत्र का एकमात्र ध्येय यह था कि कक्षा के भीतर चॉक-एंड-टॉक की पारंपरिक शैली को बदलकर आधुनिक और गतिविधि-आधारित शिक्षण को कैसे लागू किया जाए।
दिल्ली के गौरव पालिया और अंबाला की विनीता दुग्गल ने साझा किया अनुभव, शैक्षणिक खेलों से बांधा समां
कार्यशाला को वैचारिक और व्यावहारिक मजबूती देने के लिए शिक्षा जगत के दो बड़े चेहरों को आमंत्रित किया गया था। दिल्ली से आए विख्यात विषय विशेषज्ञ श्री गौरव पालिया और अंबाला की वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती विनीता दुग्गल ने मुख्य रिसोर्स पर्सन के रूप में सत्रों का संचालन किया। दोनों विशेषज्ञों ने डिजिटल युग के बच्चों की मानसिकता के अनुरूप अकाउंट्स को रोचक, सरल और प्रभावी बनाने की कई अनूठी तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया।
उन्होंने शिक्षकों को समझाया कि कैसे मुश्किल से मुश्किल जर्नल एंट्री, बैलेंस शीट की गुत्थियां और पार्टनरशिप के लंबे सवालों को माइंड मैप्स, रंग-बिरंगे चार्ट्स, फ्लो-डायग्राम, इंटरैक्टिव गेम्स और लाइव क्विज़ के माध्यम से चुटकियों में हल करना सिखाया जा सकता है। कार्यशाला की खूबसूरती यह रही कि रिसोर्स पर्सन ने केवल व्याख्यान नहीं दिया, बल्कि वहां मौजूद शिक्षकों को खुद कई शैक्षणिक खेलों का हिस्सा बनाकर छात्र जीवन के क्लासरूम का अहसास कराया।
बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक लाने का रोडमैप: ‘वर्किंग नोट्स’ और उचित फॉर्मेट पर विशेष जोर
इस कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित हिस्सा वह विशेष सत्र रहा, जिसमें बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को अकाउंट्स में 100 में से 100 अंक दिलाने की रणनीतियों पर बारीकी से मंथन हुआ। दिल्ली से आए गौरव पालिया ने स्पष्ट किया कि टॉपर बनने के लिए केवल सही उत्तर निकालना काफी नहीं है, बल्कि उत्तर पुस्तिका की प्रभावशाली प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) सबसे ज्यादा मायने रखती है।
उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे बच्चों को स्टेप-वाइज मार्किंग के महत्व को समझाएं, उचित फॉर्मेट में ही प्रश्न हल करने की आदत डालें और सबसे जरूरी— ‘वर्किंग नोट्स’ को साफ-सुथरे तरीके से लिखने पर ध्यान केंद्रित करवाएं। इसके साथ ही, तीन घंटे के भीतर पूरे प्रश्नपत्र को हल करने के लिए टाइम मैनेजमेंट और अक्सर परीक्षा के दबाव में होने वाली सिली मिस्टेक्स (सामान्य गलतियों) से बचने के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए गए।
प्राचार्या अमरजीत कौर संधू बोलीं— ‘शिक्षकों का निरंतर अपडेट होना ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी’
इससे पहले, कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करते हुए विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती अमरजीत कौर संधू ने मुख्य वक्ताओं और विभिन्न स्कूलों से आए सभी आगंतुक शिक्षकों का बुके भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। अपने संबोधन में प्राचार्या ने कहा कि एक कुशल शिक्षक वही है जो खुद को कभी सीखना बंद नहीं करने देता। इस तरह की कार्यशालाएं शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और अध्यापन की गुणवत्ता को समय के साथ निखारने में संजीवनी का काम करती हैं।
समापन के अवसर पर सभी प्रतिभागी शिक्षकों ने इस आयोजन को बेहद ज्ञानवर्धक, नवोन्मेषी और आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। शिक्षकों ने इस बेहतरीन मंच को प्रदान करने के लिए संत निश्चल सिंह स्कूल प्रबंधन और दोनों मुख्य वक्ताओं का सहहृदय आभार व्यक्त किया।

