Naveen Krishi Sankalp: ‘नवीन कृषि संकल्प अभियान’ का दूसरा चरण आज, कैथल प्रभारी रविन्द्र धीमान ने दी पूरी जानकारी
सांसद नवीन जिन्दल की पहल पर किसानों को मिलेंगे आधुनिक खेती के टिप्स
Naveen Krishi Sankalp: भारतीय कृषि व्यवस्था में किसान की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ फसल उगाना नहीं, बल्कि उसे बाजार तक सुरक्षित पहुंचाना और उसकी बर्बादी को रोकना है. इसी बुनियादी जरूरत को समझते हुए कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिन्दल की सोच से उपजे ‘नवीन कृषि संकल्प अभियान’ का दूसरा कारवां बुधवार यानी 8 जुलाई को ढांड पहुंचने जा रहा है. अनाज मंडी के समीप स्थित राधा कृष्ण धर्मशाला में सुबह ठीक साढ़े नौ बजे शुरू होने वाले इस विशेष कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र के अन्नदाताओं में खासा उत्साह है. इस बार के कार्यक्रम की खासियत यह है कि मुख्य अतिथि के रूप में पुंडरी के विधायक सतपाल जांबा मंच साझा करेंगे, जो खुद राजनीति में आने से पहले मिट्टी से जुड़े रहे हैं और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में जमीनी अनुभव रखते हैं.
जब नीति और जमीनी अनुभव मिलेंगे एक साथ: विधायक जांबा के अनुभवों का मिलेगा लाभ
आमतौर पर सरकारी या राजनीतिक अभियान केवल भाषणों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन ‘नवीन कृषि संकल्प अभियान’ को व्यावहारिक बनाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है. पुंडरी के विधायक सतपाल जांबा ने खुद बकायदा प्राकृतिक खेती का कड़ा प्रशिक्षण लिया हुआ है और वे लंबे समय से इसके प्रचार-प्रसार में जुटे हैं.
अनुभवों का खजाना: ऐसे में ढांड और आसपास के गांवों से आने वाले किसानों को एक जनप्रतिनिधि से ज्यादा एक ऐसे साथी किसान के अनुभव सुनने को मिलेंगे, जिसने खुद खेती की बारीकियों और उसके घाटे-मुनाफे को करीब से देखा है.
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक और नवीन जिन्दल फाउंडेशन की तकनीकी टीम संयुक्त रूप से किसानों को वैज्ञानिक तरीके से अन्न भंडारण (Scientific Grain Storage) के गुर सिखाएगी, ताकि नमी या कीड़ों की वजह से मेहनत की कमाई मिट्टी में न मिले.
अन्न की बर्बादी रुकेगी, तभी बढ़ेगी किसान की जेब: रविन्द्र धीमान
कैथल कार्यालय प्रभारी रविन्द्र धीमान ने अभियान के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सांसद नवीन जिन्दल का यह दृढ़ विश्वास है कि जब तक किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखने की तकनीक में आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक उसकी आय को दोगुना करने का सपना अधूरा रहेगा.
धीमान ने कहा,
“अगर किसान सही समय और सही तकनीक से भंडारण करना सीख जाए, तो न केवल देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि बाजार में मंदी के वक्त किसान को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी भी खत्म हो जाएगी.”
इसी विजन के तहत इस अभियान को पूरे कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है. बुधवार को होने वाले इस दूसरे कार्यक्रम में भारी संख्या में किसानों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञ, पंच-सरपंच और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक हिस्सा लेंगे, ताकि इस बदलाव की बयार को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके.
