SGPC Protest: अमृतसर में फिल्म ‘सतलुज’ बैन के खिलाफ SGPC का रोष मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
अमृतसर में फिल्म 'सतलुज' बैन के खिलाफ SGPC का रोष मार्च
SGPC Protest: अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने फिल्म ‘सतलुज’ पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में शुक्रवार को बड़ा रोष मार्च निकाला। गोल्डन टेंपल परिसर स्थित सूचना केंद्र से शुरू हुआ यह मार्च डिप्टी कमिश्नर कार्यालय की ओर बढ़ा। मार्च का नेतृत्व एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने किया। बड़ी संख्या में एसजीपीसी सदस्य, पदाधिकारी और श्रद्धालु हाथों में बैनर लेकर शामिल हुए तथा फिल्म पर लगी रोक हटाने की मांग करते हुए नारे लगाए।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया मांगपत्र
रोष मार्च के डीसी कार्यालय पहुंचने पर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम संबोधित मांगपत्र सौंपा गया। एसजीपीसी ने इसमें फिल्म ‘सतलुज’ पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही और प्रशासन ने पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात किया था ताकि यातायात और कानून व्यवस्था प्रभावित न हो।
14 जुलाई को सतलुज नदी किनारे होगी अरदास
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि विरोध कार्यक्रम केवल मार्च तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने घोषणा की कि 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे विशेष अरदास आयोजित की जाएगी। धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब के एक कठिन दौर से जुड़े मामलों को सामने लाने का प्रयास किया था और इसी कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। उनके जीवन पर आधारित फिल्म सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद ‘सतलुज’ नाम से तैयार की गई थी, लेकिन अब उसके प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी गई है।
‘नई पीढ़ी उस दौर को नहीं जानती’
मार्च शुरू होने से पहले अपने संबोधन में धामी ने कहा कि वर्ष 1995 के हालात को वही लोग बेहतर समझ सकते हैं, जिन्होंने उस समय को करीब से देखा है। उनका कहना था कि आज की नई पीढ़ी उस इतिहास और परिस्थितियों से पूरी तरह परिचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि फिल्म पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए ताकि लोग उस दौर की घटनाओं और परिस्थितियों को समझ सकें। धामी ने कहा कि इतिहास से जुड़े विषयों पर संवाद और जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है।
इतिहास से जुड़े मुद्दे पर उठाई आवाज
एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल एक फिल्म के प्रदर्शन का मामला नहीं है, बल्कि इतिहास और तथ्यों को लोगों तक पहुंचाने का भी विषय है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी मांग रख रही है और सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने का आग्रह कर रही है। अपने संबोधन के दौरान धामी ने लंबे समय से विभिन्न जेलों में बंद सिख बंदियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों पर उचित निर्णय लेने और लंबित मामलों का समाधान करने की अपील की।
