July 11, 2026

Ashadha Mass Teras Dates: आषाढ़ मास 2026 में तेरस कब है? नोट कर लें कृष्ण और शुक्ल पक्ष के प्रदोष व्रत की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

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Ashadha Mass Teras Dates: आषाढ़ मास 2026 में तेरस कब है? नोट कर लें कृष्ण और शुक्ल पक्ष के प्रदोष व्रत की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि पर शिव जी के साथ क्यों होती है कामदेव की पूजा? जानिए इसके पीछे का छिपा धार्मिक रहस्य

Ashadha Mass Teras Dates: पंचांग गणना के अनुसार, सौरमंडल की गतियों और तिथियों के फेरबदल के बीच इस बार का आषाढ़ मास शिव साधकों के लिए बेहद मंगलकारी साबित होने जा रहा है। 30 जून की अलसुबह 5:26 बजे से शुरू हुआ आषाढ़ का यह सफर 29 जुलाई की रात 8: 05बजे तक जारी रहेगा।

इस पूरे महीने में व्रत-त्योहारों की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन शिव जी की प्रिय तिथि ‘तेरस’ (त्रयोदशी) इस बार एक अद्भुत संयोग लेकर आ रही है। दरअसल, इस महीने पड़ने वाले दोनों ही प्रदोष व्रत रविवार के दिन आ रहे हैं, जिसे शास्त्रों में ‘रवि प्रदोष’ कहा जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष का व्रत रखने से न सिर्फ महादेव प्रसन्न होते हैं, बल्कि कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत होती है, जिससे साधक को समाज में मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

पंचांग के अनुसार नोट कर लें सटीक तारीख और समय, ताकि न छूटे पूजा

द्रिक पंचांग के गणित को समझें तो आषाढ़ मास की पहली तेरस (कृष्ण पक्ष) 12 जुलाई 2026, रविवार को पड़ेगी। इस तिथि की शुरुआत 12 जुलाई की रात (तकनीकी रूप से सुबह) 02: 04 बजे से हो जाएगी, जो उसी दिन रात 10: 29 बजे समाप्त होगी। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का शुभ समय शाम 07:22 से रात 09:24 बजे तक रहेगा।

वहीं, महीने की दूसरी तेरस (शुक्ल पक्ष) 26 जुलाई 2026को आ रही है। इस दिन दोपहर 01:57 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 27 जुलाई की दोपहर 04:14 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) की जाती है, इसलिए 26 जुलाई को ही यह व्रत रखा जाएगा। इस दिन शिव आराधना के लिए शाम 07 :16 से रात 09 :21 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

क्यों खास है त्रयोदशी? कर्ज से मुक्ति और सौंदर्य का वरदान

हिंदू धर्म शास्त्रों में त्रयोदशी तिथि को संकटों को काटने वाली तिथि माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जब चंद्रमा को क्षय रोग का श्राप मिला था, तब महादेव ने इसी तिथि पर प्रदोष काल में उन्हें पुनर्जीवन दिया था। यही वजह है कि इस दिन व्रत रखने और शाम के समय भगवान शिव संग माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से इंसान के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और आर्थिक तंगी या कर्ज के बोझ से दबे लोगों को राहत मिलती है।

इस तिथि का एक और रोचक और गूढ़ पहलू भी है। महादेव के अलावा त्रयोदशी तिथि के अधिपति प्रेम और आकर्षण के देवता कामदेव भी माने गए हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, जो लोग इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ कामदेव की भी विधि-विधान से पूजा करते हैं, उनके दांपत्य जीवन की कड़वाहट दूर होती है। साथ ही, यह पूजा व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, शारीरिक आकर्षण और आंतरिक सुंदरता को बढ़ाने वाली मानी गई है।

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